शीर्षक- आँखों की मस्ती
07 जनवरी 2021
शीर्षक- आँखों की मस्ती
आँखें भीग जाते हैं,जब दिलों में तकरार होता है।
नयन बरबस छलकते हैं,अपनों से प्यार होता है।
आँखें निराली,प्यार बरसाने वाली।
कुछ कजरारी,कुछ होती है काली।
नशीली ऑंखें,कुछ होती भोलीभाली।
नयन ही है जो सब कुछ बताने वाली।
नयन सबकुछ बताए जी,फिर भी इंतजार होता है।
आँखें भीग जाते हैं.................................1.
आँखें बोलती हैं,दिल के राज खोलती हैं।
शर्म से झुक जाए तो,बरबस ही रोती हैं।
प्रेम किसी पर आ जाए,विश्वास बढ़ाती हैं।
कुछ बोले बिना ही तो,राज हजार खोलती हैं।
ईश्वर ने दी हमें जीवन का ये अनमोल उपहार होता है।
ऑंखें भीग जाते हैं.................................2.
*सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"*
ग्राम-बाराडोली(बालसमुंद),पो.-पाटसेन्द्री
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