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डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती के शुभ अवसर पर ग्राम पंचायत मुड़िया कला चौराहा में भूमि पूजन करके एक दृश्य फोटो के आधार पर आने वाले समय में मूर्ति स्थापना करने का निर्णय लिया गया।

डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती के शुभ अवसर पर ग्राम पंचायत मुड़िया कला चौराहा में भूमि पूजन करके एक दृश्य फोटो के आधार पर आने वाले समय में मूर्ति स्थापना करने का निर्णय लिया गया।

डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती के शुभ अवसर पर ग्राम पंचायत मुड़िया कला चौराहा में भूमि पूजन करके एक दृश्य फोटो के आधार पर आने वाले समय में मूर्ति स्थापना करने का निर्णय लिया गया।
(साइंस वाणी न्यूज़) डिंडोरी। जनपद पंचायत डिंडोरी अंतर्गत ग्राम पंचायत मुड़िया कला में डॉ बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की जयंती शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास एवं जन अभियान परिषद ग्राम पंचायत मुड़िया कला डिंडोरी के संयुक्त तत्वधान में मनाई गई इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि शाहपुर थाना प्रभारी अनुराग जामदार एवं उनकी टीम के साथ मुख्य रूप से सहयोग किया गया। और ग्राम वासियों के द्वारा मुख्य अतिथि के रूप में ग्राम पंचायत सरपंच सिलोचना मरावी, सचिव ओंकार सिंह सैयाम,उपसरपंच सूरज कुंजाम, विजय सिंह ठाकुर, दुलम दास बघेल, रमेश ओबेराय, सत्यप्रकाश बेलिया, भगत सिंह मरावी, लामू सिंह परस्ते, सुरेंद्र ओबराय, निम्मू लाल झारिया, परसराम बेलिया, और सभी गांव के गणमान्य नागरिक लोग उपस्थित होकर बड़ी धूमधाम से बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जयंती को मनाया गया।(पत्रकार)रविंद्र बेलिया, राजेश ठाकुर, दिनेश ठाकुर, मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

 आप सभी वक्ताओं के माध्यम से उनको याद किया गया चाहे वह संविधान का निर्माण हो या किसी भी व्यक्ति के अधिकार के लिए कार्य हो सभी को प्राथमिकता देते हुए बाबा साहब अंबेडकर ने अपने जीवन में देश प्रेम राष्ट्रप्रेम को प्राथमिकता दी वक्ताओं द्वारा बताया गया कि बाबा साहेब का संपूर्ण जीवन समाज सुधार एवं लोगों को जागरूक करने के लिए समर्पित रहा।

बाबा साहेब की जयंती को पूरे देश में लोग उत्साह से मनाते हैं। भारत रत्न अम्बेडकर पूरा जीवन संघर्ष करते रहे । भेदभाव का सामना करते हुए उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की। आजादी की लडाई में शामिल हुए और स्वतन्त्र भारत को एक लोकतांत्रिक राष्ट्र बनाने के लिए संविधान निर्माण में अतुल्य भूमिका निभाई। बाबा साहेब ने पिछड़े और कमजोर वर्ग के अधिकारों के लिए पूरा जीवन संघर्ष किया। उन दिनों छुआछूत जैसी समस्याएं व्याप्त थीं, इस कारण उन्हें शुरुआती शिक्षा में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। लेकिन बाबा साहेब बचपन से ही बुद्धिमान और पढ़ाई में अच्छे थे, इसलिए उन्होंने जात-पात की जंजीरों को तोड़ अपनी शिक्षा पूरी की।

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