स्वास्थ्य केंद्रों से कर्मचारियों की अटैचमेंट, सीएमएचओ वैष्णव के आदेश
स्वास्थ्य केंद्रों से कर्मचारियों की अटैचमेंट, सीएमएचओ वैष्णव के आदेश
शासन अटैचमेंट खत्म करने के पक्ष में, फिर जिला कार्यालय में क्यों बुलाए गए कर्मचारी?
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की अटैचमेंट पर मचा बवाल!
सारंगढ़-बिलाईगढ़ :- सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय सारंगढ़-बिलाईगढ़ द्वारा हाल ही में जारी एक आदेश ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि आदेश के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिलाईगढ़ में पदस्थ ओम शंकर बनारसी (फार्मासिस्ट ग्रेड-2), बिलाईगढ़ सीएचसी मे प्राथमिक स्वास्थय केंद्र टूंडरी मे पदस्त अमित साहू (ग्रामीण स्वास्थ्य अधिकारी) पहले से अटैच था तथा सरसींवा में पदस्थ दीपक साहू (सहायक ग्रेड-3) को जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में अटैच कर दिया गया है।
जानकारों के अनुसार शासन स्तर पर कुछ माह पूर्व मे निर्देश जारी किए जा चुके हैं, जिनमें विभिन्न विभागों में अटैचमेंट के आधार पर कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर वापस भेजने की बात कही गई है । शासन की मंशा यह रही है कि जिन पदों का सृजन जनता को प्रत्यक्ष सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए किया गया है उन पदों पर पदस्थ कर्मचारियों की सेवाएं संबंधित संस्थानों में ही ली जाएं। इसके बावजूद जिला स्वास्थ्य कार्यालय द्वारा स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों को कार्यालय में अटैच किए जाने को लेकर विभागीय हलकों में चर्चा तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार जिन कर्मचारियों को अटैच किया गया है, वे ऐसे पदों पर कार्यरत हैं जिनकी भूमिका सीधे तौर पर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी हुई है। फार्मासिस्ट दवा वितरण और औषधि प्रबंधन का महत्वपूर्ण दायित्व निभाते हैं, वहीं ग्रामीण स्वास्थ्य अधिकारी ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन और विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे कर्मचारियों को उनके मूल कार्यस्थल से हटाकर जिला कार्यालय में संलग्न किए जाने से संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों की कार्यप्रणाली प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार जिला कार्यालय में जिन कार्यों के लिए इन कर्मचारियों को बुलाया गया है, उन कार्यों के लिए पहले से अधिकारी एवं कर्मचारी पदस्थ हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर जिला कार्यालय में अतिरिक्त कर्मचारियों की आवश्यकता क्यों महसूस की गई, इससे शासन की स्थानांतरण एवं पदस्थापना संबंधी नीतियों की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिन्ह लग सकता है।
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कुछ लोगों का मानना है कि जिले के अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और ग्रामीण स्वास्थ्य संस्थानों में पहले से ही मानव संसाधनों की कमी की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को मैदानी कार्यों से हटाकर कार्यालयीन कार्यों में लगाने से आम नागरिकों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं पर असर पड़ सकता है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।