संगमनगरी से दद्दा का था विशेष लगाव, हर कुंभ, अर्धकुंभ में उनके शिविर में बनते थे करोड़ों पार्थिव शिवलिंग
17 मई 2020
सद गृहस्थ संत पंडित देव प्रभाकर शास्त्री दद्दा जी महाराज के देवलोक खवास से उनकी शिष्य परंपरा से जुड़े हजारों अनुयायियों को गहरा झटका लगा है। संगम नगरी से उनका गहरा लगाव था। चाहे कुंभ हो या अर्धकुंभ या फिर माघमेला दद्दा का शिविर जरूर लगता था और देश के कोने कोने से आने वाले अनुयाई करोड़ों पार्थिव शिवलिंग बनाकर राष्ट्र मंगल की कामना से संगम में विसर्जित किया करते थे। उनके शिष्यों के मुताबिक दद्दा की अस्थियां संगम में विसर्जित की जाएंगी।
कटनी के कुंडा गांव निवासी पंडित देव प्रभाकर शास्त्री दद्दा जी महाराज के परलोक गमन की जानकारी मिलने के बाद यहां उनके हजारों अनुयायियों में शोक व्याप्त हो गया है। इस बार के माघ मेले में यह पहला मौका था जब शारीरिक अस्वस्थता के कारण दद्दा अपने शिविर में अनुयायियों को दर्शन देने नहीं पहुंच पाए थे। इससे पहले कुंभ में सेक्टर 12 में उनका भव्य शिविर लगा था जिसमें देश के कोने-कोने से पहुंचे शिष्यों ने सात करोड़ पार्थिव शिवलिंग बनाकर संगम में प्रवाहित किए थे।
हर कुंभ और माघ मेले में दद्दा के शिविर का संयोजन करने वाले योगेश यादव ने देर शाम बताया कि अब दद्दा की अस्थियां संगम में प्रवाहित की जाएंगी। इसकी तिथि जल्द निर्धारित होगी। उनके शिविर में अभिनेता आशुतोष राण, राजपाल यादव समेत सिनेमा व राजनीतिक जगत के लोगों का तांता लगा रहता था। विश्व कल्याण की कामना के साथ दद्दा जी ने शिवलिंग निर्माण के 129 महायज्ञ कराए थे। इसके अलावा 50 से ज्यादा अन्य यज्ञों और श्रीमद्भागवत के आयोजनो से उन्होंने समूचे देश में सनातन धर्म की पताका फहराई थी। उनके शिष्यों में राजनेता, फ़िल्म अभिनेता, उद्योगपति, समाजसेवी तथा सभी वर्गों के लोग शामिल हैं।