-->
नक्सलियों ने की अगवा उपनिरीक्षक की हत्या

नक्सलियों ने की अगवा उपनिरीक्षक की हत्या

नक्सलियों ने की अगवा उपनिरीक्षक की हत्या

अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट 
बीजापुर - छत्तीसगढ़ के बीजापुर में अगवा किये गये डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व ग्रुप) के उपनिरीक्षक मुरली ताती की नक्सलियों ने शुक्रवार की देर रात हत्या कर दी। उनका शव गंगालूर थाना क्षेत्र के पुलशुम पारा सड़क किनारे फेंक कर नक्सली भाग निकले। नक्सलियों की पश्चिम बस्तर डिवीजनल कमेटी ने जवान की हत्या करने की जिम्मेदारी लेते हुये जनअदालत में जवान को मौत की सजा सुनायी की स्वीकारोक्ति की है। नक्सलियों ने शव के ऊपर पर्चा भी रखा है , जिसे पत्थर से दबा दिया था वहीं पास में जवान का चप्पल व सामान भी रखा हुआ था। पर्चे में जवान को मारने के पीछे उसका फोर्स के साथ काम कर एड़समेटा , पालनार , मधुवेण्डी जैसे गांवों के ऊपर हमला करना , निर्दोष ग्रामीणों की हत्या करना , महिलाओं पर अत्याचार , हत्या , छेड़छाड़ करना , गरीब आदिवासियों को अवैध तरीके से गिरफ्तार कर फर्जी मामलों फंसाकर जेल में बंद करना , घर- संपत्ति को लूटपाट करना , गश्त अभियान करके लोगो को परेशान करना और फर्जी मुठभेड़ के दौरान पीएलजीए के नक्सलियों को मारना कारण बताया है। बता दें कि मुरली ताती आत्मसमर्पित नक्सली है , समर्पण के बाद वह जिला बल में भर्ती हुआ था। वे वर्ष 2006 से डीआरजी में पदस्थ थे और लगातार काम कर रहे थे। नक्सलियों के खिलाफ चलाये गये बड़े बड़े अभियान इसी की निशानदेही पर हुई थी जिससे बीजापुर पुलिस को बड़ी सफलतायें मिली थी। इसी कारण मुरली ताती का नाम नक्सलियों के हिट लिस्ट में था। नक्सलियों पर घातक हमले के कारण मुरली को चार बार अतिरिक्त पदोन्नति भी मिला था। वे जगदलपुर स्थित पुलिस लाइन में पदस्थ थे और करीब डेढ़ महीने से ईलाज के लिये छुट्‌टी पर चल रहे थे। वे बुधवार (21 अप्रैल) को गंगालूर क्षेत्र के पालनार में मेले में शामिल होने पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि वहीं से नक्सली उन्हें अगवा कर ले गये , इसके बाद से उनका कुछ पता नहीं चल रहा था। करीब दो साल पहले ही जवान का एएसआईसे प्रमोशन हुआ था। मृतक के परिजनों ने भी मीडिया के माध्य्म से नक्सलियों से रिहा करने की गुहार लगाई थी।मृतक जवान की पत्नी मैनु ताती ने नक्सलियों से अपील की थी कि उनके पति का तीन साल से मानसिक संतुलन ठीक नहीं है। मैं परेशान हूं कि अपने पति का कहीं अच्छी जगह इलाज कराऊं , मेरी नक्सलियों से अपील है कि मेरे पति को वे छोड़ दें।
मुरली ताती की रिहाई के लिये स्थानीय स्तर पर एक टीम का गठन ग्रामीणों ने किया था, लेकिन वे नक्सलियों से एसआई की रिहाई को लेकर चर्चा कर पाते, उससे पहले माओवादियों ने इस घटिया हरकत को अंजाम दे डाला। गौरतलब है कि इससे पहले 03 अप्रैल को जोनागुड़ा में फोर्स और नक्सलियों की मुठभेड़ में 22 जवानों की शहादत के बाद जम्मू-कश्मीर निवासी सीआरपीएफ जवान राकेश्वर सिंह मनहास को नक्सलियों ने बंधक बना लिया था। छह अप्रैल को नक्सलियों के बताये जाने के बाद पद्मश्री धर्मपाल सैनी सहित अन्य लोगों की मध्यस्थता से अपहृत जवान को आठ अप्रैल को सुरक्षित मुक्त कराया गया। इसके बाद उसी रात मितानिन ट्रेनर सहित तीन महिलाओं का अपहरण कर लिया था। हालांकि, अगले दिन नक्सलियों ने तीनों महिलाओं को छोड़ दिया।

Ads on article

Advertise in articles 1

advertising articles 2

Advertise under the article