एक व्यंग्य रचनाराजनीति व नक्सलियोंके लिए... *हिंंसा छोड़ों*
06 अप्रैल 2021
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एक व्यंग्य रचना
राजनीति व नक्सलियों
के लिए...
(मनहरण घनाक्षरी)
माँ जी के लाल दुलारे,
आँसुओं तुम्हें पुकारे,
दिये आप बलिदान,
माँ भारती के लिये।
🌸😣
अपनों को तूने मारा,
स्वयं से जीवन हारा,
जीवन - धारा में आओं,
हाँ विकास के लिये।
💐🙏🏼
शोषण करने वाले,
वादियाँ छीनने वाले,
उनके लिए नक्सली..?
क्या जमीर के लिये।
🌷😇
हिंंसा में नहीं भलाई,
कैसे बने हो कसाई,
बंधुगण हिंसा छोड़ो,
मानवता के लिये।
(वीर शहीद को नमन्)
कुमार🙏🏼कारनिक
"कुमार"
(छाल, रामगढ़, छग)
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