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बेरोजगारी का मार*

बेरोजगारी का मार*

*बेरोजगारी का मार*

 देश में पढ़े लिखे लाखों नौजवान नौकरी को तरस रहे हैं दर दर की ठोकर खाने को मजबूर शासन प्रशासन व नौजवानों को कर रही अनदेखा वैकेंसी के नाम पर लाखों का फर्जीवाड़ा करती राज्य सरकार पढ़े लिखे नौजवान गरीबी लाचारी बेरोजगारी से तंग आकर कर रहे आत्महत्या तो कहीं शराब बेचने को मजबूर तो कहीं नशीली दवाओं को सेवन कर नशे की लत में डूब रही नौजवान बेरोजगारी चरम था कि सीमा पार करती नजर आ रही है कहीं इंजीनियर चाय बेचते नजर आ रहे हैं तो कहीं किराने की दुकानों में सामान चलते नजर आते हैं कहीं कोई फल और सब्जी बेचते नजर आते हैं तो कहीं पेट्रोल पंप में पेट्रोल डालते नजर आते हैं तो कहीं पंचर घिरते नजर आते हैं आप जागे सोए हुए नींद से केंद्र सरकार और राज्य सरकार नौजवानों को देश का भविष्य का कर मजाक उड़ाने वाले जिनके कंधे पर देश का भविष्य है आज वही नौजवान कहां जा रहे हैं जरा सुध ले नौजवानों का भविष्य अंधकार में नजर आ रहा है 
          
                 *राधेश्याम आडिल*
                           अध्यक्ष
                 राष्ट्रीय जनसभा पार्टी 
                    जिला–गरियाबंद

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