🌱_*सजावटी पौधे : एक स्वतंत्र चिंतन*_🎄 ( *सुनील भारद्वाज* की कलम से )
21 मई 2021
🌱_*सजावटी पौधे : एक स्वतंत्र चिंतन*_🎄
( *सुनील भारद्वाज* की कलम से )
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(नोट :– इसे किसी नेता से जोड़कर न देखा जाए)
👉 *गमले में लगाए पौधे कभी वृक्ष नहीं बन पाते केवल सजावटी मात्र बनकर रह जाते हैं ।*
इन सजावटी पौधों की रौनक चहारदीवारी के अंदर ही दिखाई देता हैं बाहर इनका कोई वजूद नहीं।
इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि ये बिकते हैं ।
मालिक उन्हें बहुत ही सम्हाल और सहेज कर रखता है ताकि मेहमानों के सामने इनकी नुमाईश कर तारीफें बटोर सके।
घर का मालिक उन्हें (उन सजावटी पौधों को) कभी बड़ा होने नहीं देता, लगातार समय समय पर छांटते रहता है।
कुछ लताएं होती हैं जिन्हें मृत प्रायः लकड़ियों का सहारा देकर ऊंचाईयों तक पहुंचाया जाता है।
कुछ फूलदार पौधे भी होते हैं, जिसकी शोभा और खुशबू लोगों का मन मोह लेती हैं लेकिन उसका मालिक उन पौधों में कभी फल लगने नहीं देता ताकि इनके बीजों से कोई नया पौधा तैयार हो और किसी दूसरे के घर की शोभा बढ़ाए। अगर फल लग भी जाए तो मालिक उन्हें तोड़ कर पुनः गमले में ही लगता है उसे अपने पेड़ पर गर्व करने का अवसर नहीं देता ताकि मालिक की कृतज्ञता सदैव उन पौधों पर बनी रहे ।
इन सजावटी पौधों को सिर्फ अपने घर में रखने पर ही इसके प्रति प्रेम और सहानुभूति बनी रहती है जबकि अगर यही पौधा किसी दूसरे के घर चला जाता है तो उनके प्रति अनायास ही जलन और द्वेष की भावना जाग जाती है।
सजावटी पौधों का अपना अलग से कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता । उसे विकास के अवसर और आजादी सिर्फ उतनी ही होती है जितना कि उसका मालिक की चाहे ।
सजावटी पौधों का अपना कोई उद्देश्य नहीं होता, उनकी शोभा, अभिवृद्धि तथा स्थान भी मालिक की इच्छा पर ही निर्भर करती है ।
इन सजावटी पौधों से कभी किसी को फल खाने को नहीं मिलते और ना ही किसी आजाद परिंदे को साया मिलती है ।
इन सजावटी पौधों को गुमान होता है उन महलों पर और उनके रखवालों पर परंतु वह संरक्षण से बाहर आते ही मुरझाने लगते हैं, खुले वातावरण और धूप की तपन को बर्दास्त नहीं कर पाते ।
_अंतिम बात *भारत का संविधान* ने सबको समान अवसर दिया है अपने प्राकृतिक विकास करके एक पौधे से वृक्ष बनने तक । ताकि आपका अपना अस्तित्व सुनिश्चित हो, आप में फल लगे और हजार गुना अभिवृद्धि हो, आपका फल दूसरे भी खाने पाए और आपकी साया में असंख्य जीव जंतु शांति और सुकून पाएं । परंतु यदि आपने अपना अवसर नहीं पहचाना तो ताउम्र पीढ़ी-दर-पीढ़ी सजावटी पौधे बन कर किसी दूसरे के घर की ही शोभा बढ़ाते रहोगे और अपनी स्वीकृत गुलामी का जश्न मनाते रहोगे ।_
*जागो संविधान का दिया हुआ अवसर अभी कायम है।*
*अभी नहीं तो कभी नहीं ।*
7000150900