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हमारा वहम

हमारा वहम

हमारा वहम

साँप और चूहा दोनों का धार्मिक प्रतीकों में अहम स्थान है,एक देवों के देव महादेव जी के गला में हमेशा विद्यमान रहता है तो दूसरा उनके पुत्र गणेश जी के वाहन है जो सदा साथ रहता है। खासकर सावन महीना में लोग सर्प दर्शन को बड़ा सौभाग्य मानते हैं। वहीं इसी माह में सर्प दंश से मृत्यु भी अधिक होती है, नींद में सोए निर्दोष व्यक्ति को भी ईश्वर स्वरूप साँप डस लेता है। 
साँप का तो काम ही है काटना और खाने के तलाश में इधर-उधर भटकना। यह अपने रहने के लिए बिल(घर) नहीं बनाता बल्कि निठल्ला घूमते रहता है। यह मेंढक, छिपकली, कीड़े, चूहा और अपने ही जाति के छोटे साँप को खा कर अपनी क्षुधा शांत करता है।
जबकि चूहा अपना भूख मिटाने के लिए किसी जीव की हत्या नहीं करता। चूहा बहुत मेहनती,कर्मठ,और कर्तव्य परायण होता है। चूहा दिन-रात एक करके अपने रहने के लिए अजितउचित स्थान(बिल) तैयार करता है, जहाँ वह चैन से जीवन यापन कर सके। 
 साँपों के अपेक्षा चूहों की संख्या अधिक होता है पर भी उसके षड्यंत्र का शिकार हो जाता है।क्योंकि चूहों में एकता और आपसी सहयोग की कमी होता है जिससे साँप चूहों के बिल में घुसकर उसे मार कर खा जाता है और वहीं कब्जा कर रहने लगता है। अपितु धार्मिक मान्यता अनुसार दोनों पिता-पुत्र (शंकर जी और गणेश जी) के साथ रहते हैं और दोनों एक ही धर्म से सम्बंधित है इस लिए दोनों में बैर नहीं होनी चाहिए। यह विचार लोगों के मन में जरा सा भी नहीं आता।
एक जीव नेवला है जिसका न धार्मिक प्रतीकों में स्थान है और नहीं किसी देवी-देवताओं के साथ सम्बन्ध है कहा जाय तो पूर्णतया नास्तिक फिर भी यह इन दोनों से अधिक शक्तिशाली है।
एक बार साँप और नेवला का आपस में भिड़ंत हो गया। मुझे लगा नेवला तो गया काम से, नेवला की मति मारी गई है जो प्रलयकारी भगवान शंकर के साथ रहने वाले जीव से लड़ रहा है। पर हुआ कुछ ऐसा दोनों दमखम से लड़ने तैयार हो गए देखते-देखते युद्ध भयानक रूप ले लिया जिसे देखने धीरे-धीरे लोगों का भीड़ इकट्ठा हो गया। साँप नेवला को लपेटने की कोशिश करता लेकिन चंचल नेवला के आगे असफलता ही मिलता। ऐसा घण्टों चलता रहा। एक बार साँप ने नेवला को लपेट भी लिया मुझे लगा अब नेवला का काम तमाम परंतु प्रकृति को कुछ और मंजूर था साँप अधिक देर तक अपने लपेटे में रख न सका। लड़ते-लड़ते साँप की ऊर्जा समाप्त होने लगा तभी ताकतवर नेवला उछला,उछल कर सीधा साँप के गर्दन को पकड़ा जिससे साँप जमीन पर गिर पड़ा। नेवला तुरंत साँप को कई टुकड़ों में काट दिया। यह दृश्य देख लोगों के आँख में पड़ा धर्म का पर्दा उठ गया, वर्षों से बन्द दिमाक खुला सभी आपस में बाते करने लगे "आज तक मैं समझता था कि देवो के देव महादेव के साथ रहने वाला जिस पर शम्भु की कृपया सदा विराजमान हो वो कभी हार ही नहीं सकता" यह हमारा वहम था।

  _तिलक तनौदी 'स्वच्छंद' 
२०/०७/२०२२

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