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सरसींवा थाना मे सत्र 2025-26 मे अवैध शराब पर 187 प्रकरण दर्ज फिर भी थम नहीं रहा अवैध बिक्री, क्यों?RTI से प्राप्त जानकारी अनुसार कुल 187 प्रकरण मे आबकारी एक्ट धारा 34(2) के तहत 91 प्रकरण दर्ज।

सरसींवा थाना मे सत्र 2025-26 मे अवैध शराब पर 187 प्रकरण दर्ज फिर भी थम नहीं रहा अवैध बिक्री, क्यों?RTI से प्राप्त जानकारी अनुसार कुल 187 प्रकरण मे आबकारी एक्ट धारा 34(2) के तहत 91 प्रकरण दर्ज।



सरसींवा(सारंगढ़-बिलाईगढ़):- जिले के तहसील सरसींवा क्षेत्र में जुआ, सट्टा एवं अवैध शराब के कारोबार को लेकर एक बार फिर गंभीर प्रश्न उठने लगे हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की अवैध गतिविधियां लगातार संचालित हो रही हैं। समय-समय पर पुलिस, आबकारी एवं अन्य संबंधित विभागों द्वारा कार्रवाई किए जाने के बावजूद इन अवैध कारोबारों पर स्थायी रूप से प्रभावी नियंत्रण स्थापित नहीं हो पा रहा है।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि क्षेत्र में प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार संचालित हो रहा है। इसके कारण शासन को संभावित करोडो के राजस्व हानि होने के साथ-साथ सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भी वृद्धि हो रही है। अवैध शराब, जुआ और सट्टे जैसी गतिविधियां समाज के कमजोर वर्गों तथा युवाओं को सर्वाधिक प्रभावित कर रही हैं, जिससे कई परिवार आर्थिक और सामाजिक संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे उत्पादों के सेवन से विषाक्तता, गंभीर बीमारी तथा अन्य स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभाव होने की आशंका बनी रहती है वहीं जुआ और सट्टा जैसी गतिविधियां सामाजिक अपराधों, आर्थिक अस्थिरता तथा पारिवारिक विवादों को भी बढ़ावा देती हैं। RTI से प्राप्त जानकारी अनुसार सरसींवा थाना मे 2025-26 मे 187 अपराध आबकारी एक्ट के तहत दर्ज हुए है जिसमे 91 प्रकरण 34(2) के तहत कार्यवाही का है। 
सूत्रों ने बताया कि कच्ची महुआ शराब के निर्माण में उपयोग किए जाने वाले रासायनिक पदार्थों तथा अन्य सामग्री का बड़े पैमाने पर ट्रक एवं बसों से परिवहन किये जाते है। महुआ के व्यापार एवं शराब निर्माण में प्रयुक्त सामग्री के संबंध में आवश्यक वैधानिक अनुमति और लाइसेंस व्यवस्था की स्थिति स्पष्ट नहीं है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि अवैध शराब निर्माण में प्रयुक्त कच्चे माल तथा संदिग्ध रसायनों की आपूर्ति पर प्रभावी निगरानी रखी जाए, तो अवैध शराब निर्माण और बिक्री पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि प्रशासन द्वारा समय-समय पर छापामार कार्रवाई और जब्ती की कार्रवाई की जाती है, किंतु इनका प्रभाव अधिक समय तक दिखाई नहीं देता। कार्रवाई के कुछ समय बाद ही कथित रूप से अवैध गतिविधियां पुनः प्रारंभ हो जाती हैं।

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