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अद्भुत श्री तुलसी चरितायणम का भव्य विमोचन, मानस जगत में हर्ष की लहर।

अद्भुत श्री तुलसी चरितायणम का भव्य विमोचन, मानस जगत में हर्ष की लहर।



सिरकट्टी आश्रम, 10 जून।
आध्यात्मिक चेतना, भक्ति और साहित्य साधना के अनुपम संगम के रूप में प्रतिष्ठित महाकाव्यात्मक कृति "अद्भुत श्री तुलसी चरितायणम" का आज सिरकट्टी आश्रम स्थित मानस मंच में मानस प्रेमियों, संतजनों एवं विद्वानों की गरिमामयी उपस्थिति में भव्य विमोचन संपन्न हुआ। उल्लेखनीय है कि इस दिव्य कृति का पूर्व में छत्तीसगढ़ के यशस्वी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के करकमलों से विमोचन हो चुका है। आज पुनः मानस साधकों और रामभक्तों के मध्य इस कृति का लोकार्पण होने से पूरे मानस जगत में विशेष उत्साह एवं आनंद का वातावरण निर्मित हो गया।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के मानस जगत के वंदनीय पुरोधा नंद कुमार साहू जी ने कृति पर सारगर्भित उद्बोधन देते हुए कहा कि "अद्भुत श्री तुलसी चरितायणम केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि गोस्वामी तुलसीदास जी के जीवन, साधना और दिव्य प्रेम का आध्यात्मिक दस्तावेज है। यह प्रेम सांसारिक आकर्षण अथवा वासना का नहीं, बल्कि निर्मल, निष्कलुष, पावन और लोकमंगलकारी भक्ति का प्रेम है। तुलसी का प्रेम आत्मा को ईश्वर से जोड़ने वाला प्रेम है, जो मनुष्य को मर्यादा, करुणा, समर्पण और राममय जीवन की ओर अग्रसर करता है।" उन्होंने कहा कि यह कृति आने वाली पीढ़ियों के लिए तुलसी साहित्य और मानस परंपरा का अमूल्य धरोहर सिद्ध होगी।

इस अवसर पर लेखक की सुपुत्री सुश्री ऋचा चंद्राकर, राष्ट्रपति पुरस्कृत डॉ. मुन्नालाल देवदास, राज मानस संघ के संरक्षक अर्जुन पुरी गोस्वामी, मानस मनीषी राम राजेश साहू, मानस पुरोधा पीला राम शर्मा, मानस मर्मज्ञ रामचंद्र विश्वकर्मा, मानस पुरोधा बलराम साहू (धर्मी), मानस प्रेमी दीपक मानिकपुरी, मानस मर्मज्ञ पंडित चेतन दुलार, मानस मर्मज्ञ खुमान सिंह ध्रुव, मानस पुरोधा बालेंद्र साहू एवं प्रेमलाल साहू सहित अनेक विद्वानों एवं मानस प्रेमियों के करकमलों से कृति का विधिवत विमोचन संपन्न हुआ।

विमोचन उपरांत उपस्थित सभी विद्वानों ने एक स्वर में कृति की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि "अद्भुत श्री तुलसी चरितायणम" तुलसी साहित्य की परंपरा में एक महत्वपूर्ण और संग्रहणीय योगदान है। वक्ताओं ने इसे तुलसीदास जी के व्यक्तित्व, कृतित्व, भक्ति, दर्शन और लोकमंगलकारी चिंतन का अद्वितीय एवं शोधपरक प्रस्तुतीकरण बताया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह कृति न केवल मानस प्रेमियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी, बल्कि साहित्य, संस्कृति और अध्यात्म के क्षेत्र में भी नई दिशा प्रदान करेगी।

सिरकट्टी आश्रम का मानस मंच आज इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बना, जहाँ भक्ति, साहित्य और संस्कृति का अनुपम संगम दिखाई दिया। कृति के विमोचन ने उपस्थित जनसमुदाय को भावविभोर कर दिया तथा सम्पूर्ण वातावरण "जय श्रीराम" और "गोस्वामी तुलसीदास जी की जय" के उद्घोषों से गुंजायमान हो उठा।

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