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स्पर्धा के युग में कड़ी मेहनत ही सफलता की कुंजी : प्रो. ओमप्रकाश शास्त्रीनेहरू महाविद्यालय में नवीन शैक्षणिक सत्र 2026-27 का शुभारंभ, मां सरस्वती पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ आयोजन                                   ललितपुर।नेहरू महाविद्यालय, ललितपुर में शनिवार को नवीन शैक्षणिक सत्र 2026-27 का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ समारोहपूर्वक किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. ओमप्रकाश शास्त्री ने की। इस अवसर पर उन्होंने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय स्पर्धा का युग है और इस प्रतिस्पर्धी दौर में वही विद्यार्थी सफलता प्राप्त करेगा, जो कड़ी मेहनत, लगन एवं अनुशासन के साथ अध्ययन करेगा। प्राचार्य डॉ. शास्त्री ने कहा कि विद्यार्थी जीवन का सबसे बड़ा धर्म अध्ययन है। उन्होंने विद्यार्थियों से सांसारिक चकाचौंध से दूर रहकर अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि निरंतर परिश्रम और सकारात्मक सोच ही उज्ज्वल भविष्य का आधार है।उन्होंने शिक्षकों से भी विद्यार्थियों को समय-समय पर उचित मार्गदर्शन देने की अपील करते हुए कहा कि एक आदर्श शिक्षक वही होता है, जो विद्यार्थियों को केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि श्रेष्ठ संस्कार भी प्रदान करे। ऐसे शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन में सदैव सम्मान के पात्र बने रहते हैं। सत्रारंभ समारोह के दौरान प्राचार्य ने नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं का स्वागत करते हुए महाविद्यालय के सभी प्राध्यापकों का परिचय भी कराया। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. प्रीति सीरौटिया द्वारा सरस्वती वंदना से हुई। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दीपक पाठक ने किया, जबकि अंत में प्रो. आशा साहू ने सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।समारोह में महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम का वातावरण उत्साह, अनुशासन एवं शैक्षणिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा।

स्पर्धा के युग में कड़ी मेहनत ही सफलता की कुंजी : प्रो. ओमप्रकाश शास्त्रीनेहरू महाविद्यालय में नवीन शैक्षणिक सत्र 2026-27 का शुभारंभ, मां सरस्वती पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ आयोजन ललितपुर।नेहरू महाविद्यालय, ललितपुर में शनिवार को नवीन शैक्षणिक सत्र 2026-27 का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ समारोहपूर्वक किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. ओमप्रकाश शास्त्री ने की। इस अवसर पर उन्होंने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय स्पर्धा का युग है और इस प्रतिस्पर्धी दौर में वही विद्यार्थी सफलता प्राप्त करेगा, जो कड़ी मेहनत, लगन एवं अनुशासन के साथ अध्ययन करेगा। प्राचार्य डॉ. शास्त्री ने कहा कि विद्यार्थी जीवन का सबसे बड़ा धर्म अध्ययन है। उन्होंने विद्यार्थियों से सांसारिक चकाचौंध से दूर रहकर अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि निरंतर परिश्रम और सकारात्मक सोच ही उज्ज्वल भविष्य का आधार है।उन्होंने शिक्षकों से भी विद्यार्थियों को समय-समय पर उचित मार्गदर्शन देने की अपील करते हुए कहा कि एक आदर्श शिक्षक वही होता है, जो विद्यार्थियों को केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि श्रेष्ठ संस्कार भी प्रदान करे। ऐसे शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन में सदैव सम्मान के पात्र बने रहते हैं। सत्रारंभ समारोह के दौरान प्राचार्य ने नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं का स्वागत करते हुए महाविद्यालय के सभी प्राध्यापकों का परिचय भी कराया। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. प्रीति सीरौटिया द्वारा सरस्वती वंदना से हुई। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दीपक पाठक ने किया, जबकि अंत में प्रो. आशा साहू ने सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।समारोह में महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम का वातावरण उत्साह, अनुशासन एवं शैक्षणिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा।


चरन सिंह राज्य प्रभारी उत्तर प्रदेश एवं मनीषा विशेष संवाददाता उत्तर प्रदेश 

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