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“जब सोच में बदलाव आता है, तो विकास केवल सड़कों और भवनों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों के जीवन में दिखाई देने लगता है।”

“जब सोच में बदलाव आता है, तो विकास केवल सड़कों और भवनों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों के जीवन में दिखाई देने लगता है।”

“जब सोच में बदलाव आता है, तो विकास केवल सड़कों और भवनों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों के जीवन में दिखाई देने लगता है।”
ललितपुर। वर्ष 2021 में मात्र 21 वर्ष की आयु में मुझे अपने गांव का नेतृत्व करने का अवसर मिला। मेरे लिए यह केवल ग्राम प्रधान का पद नहीं, बल्कि अपने गांव की जिम्मेदारी संभालने और उसे विकास की नई दिशा देने का संकल्प था। बिना किसी बड़े राजनीतिक पृष्ठभूमि के मैंने गांव की जरूरतों को समझते हुए विकास की यात्रा शुरू की।
मेरी प्राथमिकता हमेशा यही रही कि गांव का विकास ऐसा हो, जिसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और ग्रामीणों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी गांव से बाहर न जाना पड़े।
महिला सशक्तिकरण को बनाया विकास का आधार
गांव की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना मेरे कार्यों की प्रमुख प्राथमिकताओं में रहा। महिलाओं के समूहों का गठन कर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास किया गया। आज गांव की अनेक महिलाएं अपने व्यवसाय और रोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।
हर महीने होने वाली बैठकों में महिलाओं की भागीदारी को विशेष महत्व दिया जाता है। महिला सशक्तिकरण, बालिका सुरक्षा और महिलाओं की सामाजिक भागीदारी को पंचायत के विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।
गांव में ही मिले जरूरी सुविधाएं ग्रामीणों को जाति, निवास, आधार कार्ड सहित विभिन्न जरूरी कार्यों के लिए बाहर न जाना पड़े, इसके लिए ग्राम सचिवालय का निर्माण कराया गया। हमारा प्रयास रहा कि सरकारी सुविधाएं और सेवाएं ग्रामीणों के और अधिक करीब आएं तथा गरीब और जरूरतमंद परिवारों को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े। सुरक्षित और स्वच्छ गांव की दिशा में कदम गांव के प्रमुख चौराहों पर कैमरों और ऑडियो व्यवस्था की स्थापना कर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया गया। वहीं स्वच्छता के लिए आरसी सेंटर और ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई, जिससे घरों और गांव से कूड़ा एकत्रित कर स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके।
गांव के आधारभूत ढांचे में व्यापक बदलाव गांव के समग्र विकास के लिए अनेक विकास कार्य कराए गए। इनमें—
- अमृत सरोवर का निर्माण
- श्मशान घाट का विकास
- अन्नपूर्णा भवन का निर्माण
- डिजिटल/ग्राम लाइब्रेरी की स्थापना
- ओपन जिम की व्यवस्था
- मनरेगा पार्क का विकास
- सड़कों एवं मार्गों का निर्माण और सुधार
- विद्यालयों का कायाकल्प
- आंगनबाड़ी केंद्रों का कायाकल्प
- नलकूपों का कायाकल्प
- नालियों का निर्माण एवं सुधार
- स्वच्छता एवं कचरा प्रबंधन की व्यवस्था
जैसे विभिन्न कार्यों को प्राथमिकता दी गई।
शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सुविधाओं पर विशेष ध्यान
मेरा मानना है कि किसी गांव का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब वहां के बच्चों को बेहतर शिक्षा का वातावरण मिले, महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षित माहौल मिले और ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं अपने गांव में ही उपलब्ध हों। इसी सोच के साथ विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों के कायाकल्प से लेकर लाइब्रेरी, ओपन जिम और अन्य जनसुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया।
विकास की यात्रा अभी जारी है
पिछले वर्षों में गांव में हुए बदलाव मेरे लिए केवल उपलब्धियां नहीं, बल्कि आगे और बेहतर करने की प्रेरणा हैं। विकास एक निरंतर प्रक्रिया है और मेरा प्रयास है कि गांव की प्रगति की यह गति लगातार बनी रहे।
21 वर्ष की युवा उम्र में मिली जिम्मेदारी को मैंने चुनौती के रूप में नहीं, बल्कि अपने गांव के लिए कुछ बेहतर करने के अवसर के रूप में स्वीकार किया। आज जब गांव की महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं, बच्चे बेहतर वातावरण में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और ग्रामीणों को अपने गांव में ही अनेक सुविधाएं मिल रही हैं, तो यह मेरे लिए सबसे बड़ी संतुष्टि है।
मेरा संकल्प है—एक ऐसा गांव, जहां विकास केवल दिखाई न दे, बल्कि हर परिवार के जीवन में महसूस हो; जहां महिलाएं सशक्त हों, बालिकाएं सुरक्षित हों, युवा आगे बढ़ें और हर ग्रामीण सम्मान के साथ अपने गांव में बेहतर जीवन जी सके।विकास की यह यात्रा जारी है… और मेरा गांव, निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है।

चरन सिंह प्रभारी उत्तर प्रदेश एवं मनीषा विशेष संवाददाता उत्तर प्रदेश 

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