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डॉ. रमेश टंडन द्वारा रचित "भकली-जकली" का विमोचन एवं समीक्षा कार्यक्रम महाविद्यालय खरसिया में हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न खरसिया, रायगढ़ |*

डॉ. रमेश टंडन द्वारा रचित "भकली-जकली" का विमोचन एवं समीक्षा कार्यक्रम महाविद्यालय खरसिया में हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न खरसिया, रायगढ़ |*



 साइंस वाणी न्यूज़ -21 अगस्त 2026 को शासकीय महात्मा गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खरसिया, जिला-रायगढ़ (छ.ग.) में छत्तीसगढ़ी उपन्यास भकली-जकली’का विमोचन एवं समीक्षा कार्यक्रम बड़े ही खुशनुमा और गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ।कार्यक्रम का आयोजन स्नातकोत्तर छत्तीसगढ़ी साहित्य परिषद एवं स्नातकोत्तर हिन्दी साहित्य परिषद के संयुक्त तत्वावधान में दोपहर 01:00 बजे किया गया।कार्यक्रम में गरिमामय उपस्थित कार्यक्रम में प्रमुख रूप से डी. आर. महेश्वरी (भूतपूर्व प्राचार्य) एच. पी. ढेढे जी (व्याख्याता - हिन्दी) रामनारायण भारद्वाज (अध्यक्ष, प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज, खरसिया) मनीराम सोनी (महासचिव, प्रगतिशील छ.ग. सतनामी समाज, खरसिया) सपना पाटले (सह-संपादक, पाश्चात्य काव्यशास्त्र) वेद प्रकाश महंत , घनश्याम टंडन , दामोदर पटेल , बुबुन घृतलहरे, परिषद की अध्यक्षा रीना साहू , पिंकी साहू एवं उपन्यास के लेखक डॉ. रमेश टंडन विशेष रूप से उपस्थित रहे।अतिथियों द्वारा छत्तीसगढ़ महतारी, बाबा गुरू घासीदास एवं संतों के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इसके पश्चात मंचस्थ अतिथियों द्वारा उपन्यास "भकली-जकली" का विमोचन किया गया।
समीक्षा सत्र में -
समीक्षकों में एच. पी. ढेढे , रामनारायण भारद्वाज , मनीराम सोनी , वेद प्रकाश महंत , घनश्याम टंडन , रीना साहू, बुबुन , आर्थो राठिया एवं अन्य उपस्थित सभी ने अपने अपने विचार रखे। सभी ने कहा कि "भकली-जकली" छत्तीसगढ़ की माटी, स्थानीय बोली छत्तीसगढ़ी भाषा और ग्रामीण जनजीवन का सजीव दस्तावेज है। लेखक ने भकली-जकली जैसे लोक शब्दों के माध्यम से मानवीय रिश्तों और संस्कृति को बहुत ही मार्मिकता से उकेरा है। भकली जकली उपन्यास में मानव समाज मे ब्याप्त आडंम्बर, अंधविश्वास, कुरीतियां, महिलाओं के प्रति
अमानवीय सोच पर चिंतन, अध्यात्मिक विचार, हक अधिकार के प्रति जागरूक करने हेतु संवैधानिक विचार, अध्यात्मिक,आन्तरिक सात्विक प्रेम से भरा हुआ विभिन्न समसामयिक समस्याओं विषयों पर प्रकाश डाला गया है। उपस्थित सभी समिक्षाकर्ताओ के द्वारा भकरी जकली उपन्यास कि भूरी भूरी प्रशंसा किया गया।
लेखक डॉ. रमेश टंडन ने अपनी लेखन यात्रा के अनुभव साझा किए और सभी का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, छात्र-छात्राएं एवं साहित्य प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन आरथो राठिया ने किया।

संवाददाता छत्तीसगढ़ 
यशोदा यादव

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