EPF, मजदूरी, बोनस और सुरक्षा पर बवाल! छाल SECL के (SKA) ठेका व्यवस्था पर मजदूरों ने उठाए गंभीर सवाल, कलेक्टर से SP तक पहुंची शिकायत
रायगढ़/छाल। एसईसीएल के छाल उपक्षेत्र में कार्यरत ठेका श्रमिकों की शिकायत ने ठेका व्यवस्था की निगरानी और मजदूरों को मिल रही सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 5 अगस्त 2026 को प्रस्तुत शिकायत पत्र में सुनील कुमार अग्रवाल (SKA) की ठेका कंपनी के खिलाफ श्रमिकों ने EPF, मजदूरी भुगतान, बोनस, कथित कटौती, सुरक्षा उपकरण, भोजन एवं आने-जाने के खर्च सहित कई बिंदुओं पर शिकायत दर्ज कर जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है।
EPF से मजदूरी तक सवाल—आखिर मजदूरों को क्या मिल रहा है?
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि श्रमिकों को EPF से संबंधित निर्धारित लाभ पूरी तरह नहीं मिल रहा है। वहीं मजदूरी भुगतान की प्रक्रिया और कथित कटौती को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। श्रमिकों ने संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।
मजदूरों का कहना है कि वे लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन शिकायत के अनुसार बोनस भुगतान को लेकर भी उनकी आपत्ति है। यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला सीधे श्रमिक हितों और ठेका श्रमिकों के अधिकारों से जुड़ सकता है।
कोयला क्षेत्र में सुरक्षा पर भी सवाल—क्या मौके पर होगी जांच?
कोयला खदान क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों के लिए सुरक्षा व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। शिकायत पत्र में सुरक्षा सामग्री और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर यह जांच करेंगे कि श्रमिकों को निर्धारित सुरक्षा उपकरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं या नहीं?
नगद भुगतान, भोजन और आने-जाने के खर्च पर भी आपत्ति
शिकायत में श्रमिकों के भुगतान की व्यवस्था, कथित नगद भुगतान, भोजन तथा आने-जाने से जुड़े खर्चों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। श्रमिकों ने मांग की है कि भुगतान रजिस्टर, उपस्थिति रिकॉर्ड, मजदूरी विवरण और अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच कर जमीन पर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।
कलेक्टर से SP और SECL प्रबंधन तक पहुंची शिकायत
शिकायत पत्र में इसकी प्रतिलिपि जिलाधीश रायगढ़, महाप्रबंधक एसईसीएल रायगढ़ क्षेत्र, पुलिस अधीक्षक रायगढ़, उपक्षेत्रीय प्रबंधक एसईसीएल छाल उपक्षेत्र तथा थाना प्रभारी छाल को दिए जाने का उल्लेख है।
शिकायतकर्ताओं ने मामले में तत्काल जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है। साथ ही शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि समय रहते उनकी समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ तो वे आगे आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।
अब सवाल सिर्फ शिकायत का नहीं, जांच की पारदर्शिता का है
मजदूरों की शिकायत के बाद अब निगाहें प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन की कार्रवाई पर टिक गई हैं। क्या EPF रिकॉर्ड की जांच होगी? क्या मजदूरी भुगतान और कथित कटौती का हिसाब खंगाला जाएगा? क्या बोनस भुगतान की वास्तविक स्थिति सामने आएगी? क्या सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता का भौतिक सत्यापन होगा?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जांच में शिकायतें सही पाई जाती हैं तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अब देखना होगा कि यह शिकायत फाइलों तक सीमित रहती है या संबंधित विभाग जमीन पर उतरकर मजदूरों की समस्याओं की जांच करता है।
