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हत्याकांड: हेड कांस्टेबल की पत्नी और 11 वर्षीय बेटी की हत्या में कुलदीप साहू समेत 4 दोषी करार, 8 अक्टूबर को सजा का ऐलान

हत्याकांड: हेड कांस्टेबल की पत्नी और 11 वर्षीय बेटी की हत्या में कुलदीप साहू समेत 4 दोषी करार, 8 अक्टूबर को सजा का ऐलान

714 दिन बाद आया अदालत का फैसला, पुलिसकर्मियों को वाहन से कुचलने की कोशिश के मामले में कुलदीप साहू को 10 साल की सजा

रायपुर/सूरजपुर। विशेष रिपोर्ट।

 साइंस वाणी न्यूज रायगढ़ प्राप्त जानकारी के अनुसार :- छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सूरजपुर दोहरे हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। हेड कांस्टेबल तालिब शेख की पत्नी और उनकी 11 वर्षीय बेटी की हत्या के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मुख्य आरोपी कुलदीप साहू समेत चार आरोपियों को दोषी करार दिया है।
न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल की अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद यह निर्णय सुनाया। दोषियों की सजा की मात्रा पर 8 अक्टूबर को फैसला सुनाया जाएगा। लगभग 714 दिन बाद आए इस फैसले ने दो साल पहले हुए इस चर्चित हत्याकांड को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
चार आरोपियों को हत्या, दुष्कर्म और POCSO के अपराध में दोषी माना
अदालत ने मुख्य आरोपी कुलदीप साहू, चंद्रकांत चौधरी उर्फ सीके, फूल सिंह उर्फ रिंकू और आरयन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को महिला और उसकी नाबालिग बेटी की हत्या के मामले में दोषी पाया है।
मामले में नाबालिग से जुड़े अपराधों के कारण POCSO Act के प्रावधान भी लगाए गए थे। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर अदालत ने चारों आरोपियों को संबंधित गंभीर अपराधों में दोषी ठहराया है।
अब अदालत के सामने अगला चरण दोषियों को दी जाने वाली सजा का निर्धारण है। इसके लिए 8 अक्टूबर की तारीख महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पुलिसकर्मियों को वाहन से कुचलने की कोशिश में कुलदीप को 10 साल की सजा
हत्याकांड से पहले हुई घटनाओं के दौरान पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को वाहन से कुचलने की कोशिश के मामले में भी अदालत ने कुलदीप साहू को दोषी माना है।
इस मामले में अदालत ने उसे 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।
घटना के शुरुआती घटनाक्रम में भी पुलिस और कुलदीप साहू के बीच विवाद तथा उसके बाद पुलिस द्वारा उसकी तलाश किए जाने की बात सामने आई थी। तत्कालीन रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस का आरोप था कि कुलदीप ने पुलिसकर्मियों को वाहन से कुचलने का प्रयास किया था।
फायरिंग के मामले में कुलदीप साहू को संदेह का लाभ
हत्याकांड के बाद फरार होने के दौरान पुलिस टीम पर कथित फायरिंग के मामले में अदालत का फैसला अलग रहा।
इस प्रकरण में कुलदीप साहू को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया। इसी मामले में सूरज साहू और नीलकेश्वर साहू को भी अदालत ने बरी कर दिया।
यानी अदालत ने अलग-अलग आरोपों और उनके समर्थन में पेश साक्ष्यों को अलग-अलग आधार पर परखा और जहां अभियोजन आरोप साबित करने में सफल नहीं रहा, वहां आरोपियों को दोषमुक्त किया गया।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और भारी भीड़

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सोमवार को अदालत परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। फैसले को लेकर बड़ी संख्या में लोग कोर्ट परिसर में मौजूद रहे और पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी।

कोर्ट से बाहर निकलते ही कैमरे के सामने मुस्कुराया कुलदीप

अदालत की कार्रवाई के बाद मुख्य आरोपी कुलदीप साहू को जब पुलिस कस्टडी में कोर्ट से बाहर लाया गया, तो उसके चेहरे पर शिकन तक नहीं थी। वह कैमरे के सामने मुस्कुराते और पोज देते हुए नजर आया। सामने आए वीडियो में वह "कैमरा बनाए जाने" की बात कहते हुए भी दिखाई दे रहा है। कुलदीप के इस बेपरवाह अंदाज और रवैये को लेकर कोर्ट परिसर में मौजूद लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं।


13-14 अक्टूबर 2024 की दरमियानी रात हुई थी वारदात
यह पूरा मामला 13 और 14 अक्टूबर 2024 की दरमियानी रात सामने आया था। सूरजपुर में हेड कांस्टेबल तालिब शेख की पत्नी और 11 वर्षीय बेटी की हत्या के बाद दोनों के शव घर से लगभग पांच किलोमीटर दूर मिले थे। घटना की जानकारी सामने आने के बाद पूरे इलाके में भारी आक्रोश फैल गया था।
तत्कालीन पुलिस जांच में हत्या से पहले महिला के साथ दुष्कर्म किए जाने का आरोप भी सामने आया था। नाबालिग बच्ची से जुड़े आरोपों के कारण मामला POCSO कानून के तहत भी गंभीर आपराधिक प्रकरण बन गया।
घटना के बाद सूरजपुर में तनाव की स्थिति बनी और आरोपी के घर तथा अन्य परिसरों में आगजनी की घटनाएं भी हुई थीं। तत्कालीन रिपोर्टों में पुलिस ने कुलदीप साहू के खिलाफ पहले से दर्ज कई आपराधिक मामलों का भी उल्लेख किया था।
जांच के दौरान कई नाम सामने आए
हत्याकांड की जांच आगे बढ़ने के साथ मुख्य आरोपी के अलावा कई अन्य लोगों के नाम सामने आए और गिरफ्तारियां हुईं। शुरुआती दौर में पुलिस ने कुलदीप साहू के अलावा अन्य आरोपियों को भी हिरासत में लिया था।
मामले की जांच और कार्रवाई को लेकर पुलिस विभाग की भूमिका भी चर्चा में रही। बाद में एक आरक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की खबर सामने आई थी। जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर आरक्षक प्रदीप साहू को बर्खास्त किए जाने की जानकारी भी सार्वजनिक हुई थी। 
अब 8 अक्टूबर पर टिकी नजर
अदालत द्वारा चार आरोपियों को दोषी करार दिए जाने के बाद अब सभी की नजर 8 अक्टूबर को होने वाली सजा की सुनवाई पर है।
इस दिन अदालत यह तय करेगी कि हत्या, दुष्कर्म और POCSO से जुड़े अपराधों में दोषी पाए गए आरोपियों को कानून के तहत कितनी सजा दी जाएगी।
सूरजपुर का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें एक पुलिसकर्मी के परिवार की महिला और नाबालिग बेटी की हत्या हुई थी। घटना के बाद कानून-व्यवस्था, पुलिस की कार्रवाई, आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड और जांच की प्रक्रिया को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी।
अदालत का वर्तमान फैसला आरोपों के न्यायिक परीक्षण के बाद आया है। वहीं, जिन आरोपों में आरोपियों को दोषमुक्त किया गया है, उनमें अदालत के निष्कर्ष को अलग से देखा जाना होगा। अंतिम रूप से मामले की कानूनी स्थिति आगे की न्यायिक कार्यवाही और संभावित अपीलों पर भी निर्भर करेगी।

हेमंत कुमार टंडन 
 जिला ब्यूरो चीफ रायगढ़ छत्तीसगढ़

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