जन्मजात बधिरता से मिली नई आवाज, चिरायु योजना से तिक्षिका के जीवन में लौटी उम्मीद**दो वर्षीय नन्ही बालिका तिक्षिका साहू निःशुल्क कॉक्लियर इम्प्लामेंट सर्जरी के बाद सुनने और बोलने की दिशा में कर रही निरंतर प्रगति
24 सितंबर 2026
सक्ती, 24 सितम्बर 2026// सेवा संकल्प अभियान के तहत शासन की जनकल्याणकारी योजनाओ से आमजन की सेवा की कहानिया सामने आ रही है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) के अंतर्गत समय पर स्वास्थ्य जांच, उचित रेफरल और विशेषज्ञ चिकित्सकीय उपचार के माध्यम से जैजैपुर विकासखंड के ग्राम हसौद निवासी दो वर्षीय तिक्षिका साहू, पिता श्री डोरेश कुमार साहू, को जन्मजात बधिरता की समस्या से उबरने का अवसर मिला है। जन्म से ही दोनों कानों से सुनाई नहीं देने वाली तिक्षिका का उपचार अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर में निःशुल्क कॉक्लियर इम्प्लामेंट सर्जरी के माध्यम से कराया गया। उपचार के बाद बच्ची वर्तमान में पूर्णतः स्वस्थ है तथा सुनने और बोलने की दिशा में निरंतर प्रगति कर रही है। तिक्षिका को जन्म से ही दोनों कानों से सुनाई नहीं देता था। परिवार ने महसूस किया कि तेज आवाज पर भी बच्ची कोई प्रतिक्रिया नहीं देती है। इस चुनौती के बीच राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित चिरायु योजना ने परिवार के लिए नई उम्मीद जगाई। विकासखंड जैजैपुर की चिरायु आरबीएसके हेल्थ टीम द्वारा नियमित आंगनबाड़ी भ्रमण के दौरान बच्ची की स्वास्थ्य जांच की गई। जांच के दौरान जन्मजात बधिरता की आशंका सामने आने पर उसे जिला चिकित्सालय जांजगीर के ईएनटी विभाग में परीक्षण के लिए भेजा गया। नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञ द्वारा आवश्यक जांच के बाद बच्ची को उच्च स्तरीय उपचार के लिए एम्स रायपुर रेफर किया गया। एम्स रायपुर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में उपचार प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। कॉक्लियर इम्प्लामेंट से पूर्व आवश्यक ऑडियोलॉजी जांच, बीईआरए टेस्ट, इमेजिंग एवं सीटी स्कैन सहित विभिन्न आवश्यक परीक्षण किए गए। इसके साथ ही वैक्सीनेशन एवं अन्य अनिवार्य चिकित्सकीय प्रक्रियाएं भी पूर्ण की गईं। सभी आवश्यक जांच और चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद एम्स रायपुर के ईएनटी विभाग की दक्ष चिकित्सकीय टीम द्वारा बच्ची की कॉक्लियर इम्प्लामेंट सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। सर्जरी के बाद तिक्षिका के लिए स्पीच थेरेपी भी प्रारंभ की गई, जिससे वह सुनने के साथ-साथ बोलने की क्षमता विकसित कर सके। चिरायु योजना के अंतर्गत पूरी उपचार प्रक्रिया में बच्ची को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।
समय पर पहचान, उचित रेफरल, विशेषज्ञ चिकित्सकीय समन्वय और निरंतर उपचार के कारण तिक्षिका को बेहतर जीवन की ओर आगे बढ़ने का अवसर मिला है। वर्तमान में बच्ची पूर्णतः स्वस्थ है और सुनने तथा बोलने की दिशा में लगातार प्रगति कर रही है। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में उसकी स्पीच थेरेपी एवं पुनर्वास की प्रक्रिया भी जारी है। तिक्षिका की यह सफलता उसके परिवार के लिए खुशी का अवसर होने के साथ ही शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं की सार्थक पहल का उदाहरण है। यह प्रकरण दर्शाता है कि बच्चों में जन्मजात विकृतियों एवं स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान, प्रभावी रेफरल तथा शासकीय स्वास्थ्य योजनाओं के समन्वित प्रयास से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का उपचार संभव है। चिरायु योजना के माध्यम से मिली निःशुल्क उपचार सुविधा ने तिक्षिका को सुनने और बोलने की नई राह दी है तथा उसके सामान्य जीवन की ओर बढ़ने की उम्मीद को मजबूत किया है।
साइंस वाणी न्यूज़ शक्ति से संवाददाता अशोक जायसवाल की रिपोर्ट