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संतान की सुख समृद्धि और सफलता के लिए हलषष्ठी व्रत का विशेष महत्व-आचार्य पं जितेन्द्र तिवारी

संतान की सुख समृद्धि और सफलता के लिए हलषष्ठी व्रत का विशेष महत्व-आचार्य पं जितेन्द्र तिवारी


संवाददाता:सरिता साइंस वाणी न्यूज़ छत्तीसगढ़
 जांजगीर-चांपा
बिर्रा -हलषष्ठी व्रत पूजन का शुभारंभ महुए के दातून से शुरू हुआ ।इस संबंध में राजपुरोहित पं जितेन्द्र तिवारी ने बताया कि संतान की सुख समृद्धि और सफलता के भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को माताएं विधि विधान से पूजन किया।इस दिन भैंस के दूध-दही से पूजन किया गया इस वर्ष सिद्धि और रवि योग का संयोग रहा हैं। उन्होंने कहा कि संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और रक्षा की कामना का पर्व हलष्ठी यानी कमरछठ बुधवार 2 सितंबर को श्रद्धा और परंपरा के साथ बिर्रा संजयनगर थाना चौक,राजमहल बिर्रा,महाबीर थवाईत मुहल्ला साहू मोहल्ला घनवासागर मुहल्ले भाटापारा आदि स्थानों में सामूहिक पूजन उत्सव और घरों में माताओं ने धार्मिक वातावरण में मनाया गया। माताएं सुबह महुए की दातून कर व्रत का संकल्प लेकर और दिनभर निर्जला उपवास रखने के बाद दोपहर से हलषष्ठी (खमरछठ-कमरछठ) माता की पूजा-अर्चना की और छः अध्याय की कथा सुनी। इसके बाद पसहर चावल, महुआ और छह प्रकार की भाजी से व्रत का पारण कर व्रत तोड़ी।

*पूजा का शुभ मुहूर्त*  

पंचांग के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि 2 सितंबर को सुबह 6.12 बजे शुरू होकर 3 सितंबर को सुबह 4.25 बजे तक रहेगी। इस दिन सिद्धि योग और रवि योग का संयोग है, जिसे पूजा और दान के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। सुतिहारी के बाद से दोपहर तक का समय पूजन के लिए सबसे उत्तम रह।

*बाजार में 20% तक महंगी हुई पूजन सामग्री*  

हलषष्ठी के एक दिन पहले मंगलवार को बाजारों में दिनभर भीड़ रही। पसहर चावल 100- 120 रुपये प्रति किलो तक बिका। वहीं पसहर की कीमत में करीब 20 प्रतिशत महंगा महुआ, दातून, फूल, काशी के फूल, खमरछठ की टहनियां, दोना-पत्तल और मिट्टी के खिलौनों की भी अच्छी बिक्री हुई। डेयरियों में भैंस के दूध की मांग बढ़ने से कई लोगों ने पहले से ऑर्डर भी बुक कर लिया। वहीं कुछ विशेष लोगों ने जिसमें थवाईत डेलिनीड्स और सौखीलाल पटेल ने नि शुल्क भैंस की दूध दही घी बांटा गया।

*ऐसे हुई पूजा*  
आचार्य पं जितेन्द्र तिवारी महाराज ने बताया कि व्रत की शुरुआत गणेश पूजन से होती है। शिवजी का अभिषेक कर बेलपत्र अर्पित किया जाता है और माता गौरी को सिंदूर सामग्री व पीले वस्त्र चढ़ाए जाते हैं। पूजा में भैंस के दूध और दही घी का विशेष महत्व माना जाता है। महिलाएं सागरी बनावटी तालाब के पास पलाश की शाखा स्थापित कर छह प्रकार के अनाज अर्पित करती हैं। इस व्रत में हल से जोते गए खेत का अन्न नहीं खाया जाता।

*षष्ठी का विशेष महत्व*  
आचार्य श्री ने कहा कि हलषष्ठी को समता और मातृत्व व्रत भी कहा जाता है। इसमें षष्ठी अंक का विशेष महत्व है। छह प्रकार के भोग चढ़ाए गए ,छह तरह के खिलौने अर्पित किए गए, छह कंचे सुलाई गई ,सागरी में छह बार जल अर्पित किया गया,संताने को पीठ पर छह बार कपड़े की पोटली से थाप देकर आशीर्वाद दिया गया अंत में छह प्रकार की भाजी के साथ व्रत का पारण किया, उन्होंने पसहर चावल के फायदे पसहर का वैज्ञानिक महत्व भी बताया गया कि महुआ औषधीय गुणों से भरपूर होता है। पसहर चावल शरीर में जलन और एलर्जी कम करने में सहायक माना जाता है। वजन नियंत्रण में भी मदद करता है। 6 प्रकार की भाजी से प्रोटीन, विटामिन-सी और अन्य आवश्यक खनिज मिलते हैं, जो पाचन, त्वचा व बालों के लिए लाभकारी हैं।इस तरह बिर्रा क्षेत्र में बड़ी आस्था नियम विश्वास और श्रद्धा के साथ हलषष्ठी खमरछठ-कमरछठ व्रत पूजन किया गया।

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