बरमकेला में साहित्यिक आयोजन ने जगाई साहित्य प्रेम की अलख, कवियों की प्रस्तुतियों से ऐतिहासिक बना नवरात्रि सत्र
22 अक्टूबर 2026
बरमकेला। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले का ऐतिहासिक विकासखंड बरमकेला इन दिनों साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है। क्षेत्र में आयोजित साहित्यिक कार्यक्रमों के जरिए आम जनमानस में काव्य और साहित्य के प्रति प्रेम की अलख जगाई जा रही है। ऐसे आयोजन न केवल मानवीय संवेदनाओं को अभिव्यक्ति देते हैं, बल्कि समाज को आईना दिखाने और राष्ट्रहित की भावना को प्रोत्साहित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
साहित्य को जन-जन तक पहुंचाने का बीड़ा उठाने वाले साहित्यकार कमलेश धाकड़, कुम्हारी वाले अपने तन, मन और धन से छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों के साहित्यकारों को मंच प्रदान करने में जुटे हैं। उनके प्रयासों से बरमकेला क्षेत्र ने साहित्यिक जगत में अपनी अलग पहचान बनाई है। वे प्रख्यात साहित्यकारों के साथ-साथ नवोदित कवियों को भी अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान कर रहे हैं।
इसी कड़ी में नवरात्रि सत्र के दौरान विभिन्न विधाओं के ख्यातिप्राप्त कवियों ने अपनी रचनाओं और शानदार प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को यादगार बना दिया। साहित्य पुरोधा कमलेश धाकड़ के मार्गदर्शन में आयोजित इस साहित्यिक आयोजन में ब्लैक डायमंड के नाम से विख्यात हास्य-व्यंग्य एवं गीत के आशुकवि डॉ. जमुना जवान गोरा, छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कवि एवं मंच संचालक शशिभूषण स्नेही, बिलासपुर से कवि शरद यादव ‘अक्स’, अध्यक्ष, कृतिकला साहित्य मंच सहित अनेक साहित्यकारों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम में कवयित्री पूर्णिमा चौधरी एवं सोम प्रभा नूर ने श्रृंगार रस की प्रस्तुतियां दीं। वहीं डॉ. तेजराम नायक ने हास्य-व्यंग्य, जयंत यादव ने वीर रस तथा कवि मनीराम मितान, सिमगा ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। इसके अतिरिक्त सुरेंद्र अग्निहोत्री ‘आगी’, कवि महेंद्र बेजुबां और कवि हीरामणि वैष्णव सहित अन्य साहित्यकारों की सहभागिता ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।
कवियों की विविधतापूर्ण प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को कभी हंसाया, कभी भावुक किया तो कभी सामाजिक एवं राष्ट्रीय चेतना से जुड़ने की प्रेरणा दी। साहित्य के माध्यम से जनकल्याण, सामाजिक सद्भाव और सामूहिक एकता का संदेश भी दिया गया।
साहित्यिक गतिविधियों से बढ़ रहा जनमानस का जुड़ाव
बरमकेला क्षेत्र में लगातार हो रही साहित्यिक गतिविधियों से आम लोगों के बीच साहित्य के प्रति रुचि बढ़ रही है। साहित्यकारों के प्रयासों से स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी कला और विचार प्रस्तुत करने का अवसर मिल रहा है। साथ ही, छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को व्यापक पहचान मिल रही है।
साहित्यिक क्षेत्र में किए जा रहे इन प्रयासों से बरमकेला अब केवल एक भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित पहचान नहीं, बल्कि साहित्य और काव्य के प्रति समर्पित अंचल के रूप में भी उभर रहा है। ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक विचारों, सद्भाव और जनचेतना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहे हैं।