कांवड़ यात्रा बीच में रोकी, मानव सेवा को बनाया अपना धर्म
02 अक्टूबर 2026
लकवे के झटके से पीड़ित तुलाराम चौहान को 700 किलोमीटर दूर देवघर से रायगढ़ लाकर कराया उपचार, उमाचरण यादव और जय पटेल ने पेश की मानवता की मिसाल
रायगढ़/पुटकापुरी। ग्राम पुटकापुरी निवासी तुलाराम चौहान विगत माह बाबा धाम में भगवान शिव को जल चढ़ाने के लिए झारखंड के देवघर कांवड़ यात्रा पर गए थे। उनके साथ गांव के अन्य श्रद्धालु भी मौजूद थे। इसी दौरान देवघर में जल भरने के बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें लकवे का झटका आ गया। इसके कारण उनके शरीर का बायां हिस्सा सुन्न हो गया।
अचानक आई इस गंभीर परिस्थिति से उनके साथ गए ग्रामीणों में चिंता का माहौल बन गया। ऐसी स्थिति में तुलाराम चौहान को तत्काल उपचार की आवश्यकता थी। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि उन्हें सुरक्षित रूप से उनके गृह जिला रायगढ़ तक कैसे पहुंचाया जाए।
इसी मुश्किल समय में ग्राम के उमाचरण यादव एवं जय पटेल ने मानवता का परिचय देते हुए अपनी कांवड़ यात्रा को बीच में ही रोकने का निर्णय लिया। दोनों ने अपनी धार्मिक यात्रा से पहले एक बीमार व्यक्ति की सेवा को प्राथमिकता दी और तुलाराम चौहान को सुरक्षित घर पहुंचाने का बीड़ा उठाया।
दोनों ने तत्काल एंबुलेंस की व्यवस्था की और लगभग 700 किलोमीटर की दूरी तय कर तुलाराम चौहान को देवघर से उनके गृह जिला रायगढ़ पहुंचाया। लंबी यात्रा के दौरान उनकी देखभाल करते हुए उन्हें सुरक्षित रूप से परिवार के पास पहुंचाने में दोनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रायगढ़ पहुंचने के बाद तुलाराम चौहान को उनके परिवारजनों की उपस्थिति में संजीवनी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। डॉ. प्रकाश चेतवानी के सानिध्य में उपचार की व्यवस्था कराने में भी उमाचरण यादव और जय पटेल का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
इसके बाद डॉ. नितीश नायक के अस्पताल में तुलाराम चौहान का उपचार किया गया। उपचार के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ और वर्तमान में वे स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। समय पर उपचार मिलने से परिवार को भी बड़ी राहत मिली है।
कांवड़ से पहले निभाया इंसानियत का फर्ज
उमाचरण यादव और जय पटेल का यह कार्य इसलिए विशेष माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने अपनी धार्मिक यात्रा को बीच में रोककर एक बीमार व्यक्ति की मदद को प्राथमिकता दी। उन्होंने यह संदेश दिया कि मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।
ग्रामीणों का कहना है कि बाबा धाम की यात्रा आस्था का विषय है, लेकिन किसी व्यक्ति के संकट में पड़ने पर उसकी सहायता के लिए अपनी यात्रा रोक देना सच्ची मानवता का परिचय है। उमाचरण यादव और जय पटेल ने जिस संवेदनशीलता, सेवा भावना और जिम्मेदारी का परिचय दिया, वह समाज के लिए प्रेरणादायक है।
ग्रामीणों ने राज्य शासन से सम्मानित करने की मांग की
इस मानवीय कार्य की क्षेत्र में सराहना हो रही है। ग्रामीणों ने राज्य शासन एवं जिला प्रशासन से उमाचरण यादव और जय पटेल को उनके अनुकरणीय सेवा कार्य के लिए सम्मानित करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे सेवाभावी लोगों को सम्मान मिलने से समाज में मानवता, सहयोग और संवेदनशीलता की भावना को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही भावी पीढ़ी भी जरूरतमंदों की सहायता करने के लिए प्रेरित होगी।
तुलाराम चौहान के परिवार ने भी संकट की घड़ी में साथ देने वाले उमाचरण यादव एवं जय पटेल के प्रति आभार व्यक्त किया है।
यह घटना समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि धार्मिक आस्था के साथ मानवता और सेवा का भाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उमाचरण यादव और जय पटेल ने अपनी कांवड़ यात्रा बीच में रोककर जिस तरह एक बीमार व्यक्ति को लगभग 700 किलोमीटर दूर से सुरक्षित उसके परिवार तक पहुंचाया, वह निश्चित रूप से मानव सेवा और संवेदनशीलता की प्रेरणादायक मिसाल है।