जनपद से महज 2 किलोमीटर दूर रुडुकेला पंचायत, फिर भी सचिव की कथित अनुपस्थिति से ग्रामीण परेशान! प्रमाण पत्रों से लेकर पंचायत बैठकों तक, कामकाज पर उठे सवाल
04 नवंबर 2026
संवाददाता : संतोष कुमार चौहान / साइंस वाणी न्यूज़, लैलूंगा
लैलूंगा। जनपद पंचायत मुख्यालय से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत रुडुकेला में पंचायत व्यवस्था की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिस पंचायत से ग्रामीणों को बुनियादी प्रशासनिक सुविधाएं आसानी से मिलनी चाहिए, वहां लोगों को अपने जरूरी कामों के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ने के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, पंचायत सचिव की कथित अनियमित उपस्थिति के कारण पंचायत के कामकाज प्रभावित हो रहे हैं और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
आय, जाति, निवास और जन्म प्रमाण पत्र के लिए भटकने को मजबूर ग्रामीण
ग्रामीणों के मुताबिक, आय, जाति, निवास और जन्म प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों से जुड़े कार्यों के लिए उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीण पंचायत कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन सचिव की अनुपस्थिति के कारण कई बार उन्हें बिना काम कराए वापस लौटना पड़ता है। इन दस्तावेजों की जरूरत विद्यार्थियों, नौकरी के आवेदकों और विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ लेने वाले हितग्राहियों को पड़ती है। ऐसे में समय पर काम नहीं होने से उनकी परेशानियां बढ़ सकती हैं।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब पंचायत सचिव की जिम्मेदारी ग्रामीणों को शासन की योजनाओं और आवश्यक प्रशासनिक सेवाओं से जोड़ना है, तो पंचायत कार्यालय में नियमित कामकाज सुनिश्चित क्यों नहीं हो पा रहा है? आखिर आम नागरिक अपनी समस्याओं के समाधान के लिए किसके पास जाएं?
पंचायत की बैठकें भी निरस्त होने के आरोप, विकास कार्यों पर असर की आशंका
मामला केवल प्रमाण पत्रों तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। आरोप है कि ग्राम पंचायत की बैठकें भी आए दिन निरस्त हो जाती हैं। इससे गांव के विकास कार्यों, स्थानीय समस्याओं और जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा प्रभावित होने की बात कही जा रही है।
ग्राम पंचायत की बैठकें ग्रामीण विकास की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण माध्यम होती हैं। इनमें गांव की आवश्यकताओं, निर्माण कार्यों, मूलभूत सुविधाओं और अन्य जनहित के मुद्दों पर विचार किया जाता है। ऐसे में यदि बैठकें नियमित रूप से आयोजित नहीं होती हैं, तो पंचायत के कामकाज और निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि, बैठकों के निरस्त होने के वास्तविक कारणों और उनकी आधिकारिक स्थिति की पुष्टि संबंधित पंचायत एवं जनपद अधिकारियों से किया जाना आवश्यक है।
उपसरपंच पति ने सचिव की कार्यप्रणाली पर लगाए गंभीर आरोप
इस मामले में उपसरपंच पति ने पंचायत सचिव की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सचिव के मुख्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहने के कारण ग्रामीणों के जरूरी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। साथ ही पंचायत में जनहित से जुड़े काम भी अपेक्षित गति से नहीं हो पा रहे हैं।
उनके आरोपों के बाद पंचायत में प्रशासनिक व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, मामले में पंचायत सचिव का पक्ष और उनकी अनुपस्थिति के संबंध में आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना भी जरूरी है, ताकि पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
जनपद से दो किलोमीटर की दूरी, फिर भी व्यवस्था पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ग्राम पंचायत रुडुकेला जनपद पंचायत मुख्यालय से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, तो पंचायत के नियमित संचालन की निगरानी में परेशानी क्यों आ रही है? क्या संबंधित अधिकारी पंचायत सचिव की उपस्थिति और लंबित कार्यों की नियमित समीक्षा कर रहे हैं? क्या ग्रामीणों को प्रमाण पत्रों और अन्य जरूरी कार्यों के लिए बार-बार पंचायत कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ेंगे?
ग्रामीणों की समस्याओं को देखते हुए संबंधित अधिकारियों द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक है। साथ ही पंचायत कार्यालय में नियमित उपस्थिति, प्रमाण पत्रों से जुड़े लंबित कार्यों का समयबद्ध निराकरण और पंचायत बैठकों का नियमानुसार आयोजन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
अब जिम्मेदार अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
ग्राम पंचायत रुडुकेला में उठ रहे सवाल केवल एक पंचायत के कामकाज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण स्तर पर प्रशासनिक जवाबदेही और आम नागरिकों को समय पर सुविधाएं उपलब्ध कराने से भी जुड़े हैं। ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित अधिकारी मामले को गंभीरता से लें, पंचायत सचिव की उपस्थिति की जांच करें और प्रभावित कार्यों को जल्द पूरा कराने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।
अब देखना यह होगा कि जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई करते हैं और रुडुकेला के ग्रामीणों को अपनी ही पंचायत में जरूरी सुविधाओं के लिए इंतजार से कब राहत मिलती है।