हमर राज के पावन भुइयाँ
01 नवंबर 2026
हमर राज के पावन भुइयाँ, अब्बड़ सुघ्घर हावय।
जल जंगल अउ हरियाली हा, सबके मन ला भावय।।
दुलरू छत्तीसगढ़ हवय जी, नाम सबो जन जानँय।
धान कटोरा कहॅंय सबो जी, सबला सिधवा मानँय।।
दुरिहा - दुरिहा ला देखे बर, जम्मों संगी आवय।
हमर राज के पावन भुइयाॅं, अब्बड़ सुघ्घर हावय।।
देखव चारो मुड़ा घूम के, अबड़ नीक ये लागे।
इहाॅं सबो मन देखव संगी, झूल परे ला जागे।।
बसे हवय जंगल मा तन-मन, मन ल मोह वो जावय।
हमर राज के पावन भुइयाॅं, अब्बड़ सुघ्घर हावय।।
महानदी शिवनाथ देख ले, इंद्रावती ह बढ़िया।
गरब करय गा देखव संगी, सबो छत्तीसगढ़िया।।
बोली मधरस सही लागथे, अंतस मया समावय।
हमर राज के पावन भुइयाॅं, अब्बड़ सुघ्घर हावय।।
✍️लोको पायलट-संतोष मिरी 'हेम'
कोरबा (छत्तीसगढ़)
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