खेतों में खिला आत्मनिर्भरता का फूल! गेंदा की खेती से भोजकुमारी पैकरा ने लिखी सफलता की नई कहानी, ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणालैलूंगा की भोजकुमारी पैकरा की पहल से महिला सशक्तिकरण को मिल रही नई पहचान, पारंपरिक खेती के साथ फूलों की खेती अपनाकर स्वरोजगार की दिशा में बढ़ाया कदम
04 नवंबर 2026
संवाददाता : संतोष कुमार चौहान / साइंस वाणी न्यूज़, लैलूंगा
लैलूंगा। ग्रामीण अंचलों में अब महिलाएं केवल घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खेती-किसानी और उद्यानिकी के क्षेत्र में भी अपनी मेहनत, लगन और हुनर से नई पहचान बना रही हैं। इसका एक प्रेरणादायक उदाहरण लैलूंगा क्षेत्र के ग्राम राजपुर में देखने को मिला है, जहां भोजकुमारी पैकरा ने गेंदा फूल की खेती अपनाकर महिला आत्मनिर्भरता की दिशा में सराहनीय पहल की है।
सतनसाय पैकरा के परिवार से जुड़ी श्रीमती भोजकुमारी पैकरा ने पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलों और फूलों की खेती की संभावनाओं को समझते हुए गेंदा फूल की खेती का प्रयास किया है। उनका यह कदम ग्रामीण क्षेत्र में कृषि के नए विकल्पों को अपनाने और स्वरोजगार की संभावनाएं तलाशने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर चुनी नई राह
आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में किसान धान एवं अन्य पारंपरिक फसलों की खेती को प्राथमिकता देते हैं। वहीं भोजकुमारी पैकरा ने गेंदा फूल की खेती को अपनाकर एक अलग दिशा में कदम बढ़ाया है। फूलों की खेती कम जमीन में भी बेहतर प्रबंधन और बाजार की उपलब्धता के आधार पर अतिरिक्त आमदनी का अवसर प्रदान कर सकती है।
गेंदा फूल का उपयोग धार्मिक आयोजनों, पूजा-पाठ, त्योहारों, शादी-विवाह और विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। ऐसे में इसकी खेती ग्रामीण महिलाओं के लिए आय के वैकल्पिक साधन के रूप में संभावनाएं रखती है।
महिला सशक्तिकरण की जमीन पर खिल रहे सफलता के फूल
भोजकुमारी पैकरा का प्रयास इस बात का संदेश देता है कि यदि महिलाओं को अवसर, संसाधन और उचित प्रोत्साहन मिले तो वे कृषि एवं उद्यानिकी के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बना सकती हैं। गांव की महिलाएं अपनी मेहनत और कौशल के बल पर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
उनकी यह पहल क्षेत्र की अन्य महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को भी पारंपरिक खेती के साथ फूलों की खेती, सब्जी उत्पादन तथा अन्य उद्यानिकी गतिविधियों को अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती है।
कृषि विभाग और उद्यानिकी विभाग से प्रोत्साहन की उम्मीद
ग्रामीण क्षेत्रों में महिला कृषकों को आगे बढ़ाने के लिए कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की योजनाओं, तकनीकी मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण बीज, पौध सामग्री और बाजार से जुड़ाव की महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि भोजकुमारी पैकरा जैसी महिला कृषकों को उचित मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन मिले तो वे अपने प्रयासों को और आगे बढ़ा सकती हैं।
गांव की महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
लैलूंगा के ग्राम राजपुर की भोजकुमारी पैकरा ने गेंदा फूल की खेती के माध्यम से यह संदेश दिया है कि आत्मनिर्भरता की शुरुआत अपने गांव और अपनी जमीन से भी की जा सकती है। उनका यह प्रयास ग्रामीण उद्यमिता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण है।
आज जरूरत है कि ऐसी मेहनतकश महिला कृषकों के प्रयासों को पहचान मिले और उन्हें प्रोत्साहित किया जाए, ताकि ग्रामीण अंचलों की अन्य महिलाएं भी खेती-किसानी में नए प्रयोग करते हुए आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ सकें।
खेतों में खिले गेंदा के फूल अब केवल सुंदरता ही नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के सपनों, मेहनत और आत्मनिर्भर बनने के संकल्प का भी संदेश दे रहे हैं।