-->
भारत की पूंजीवादी राजनैतिक पार्टियां आदिवासियों का आर्थिक विकास नही चाहतीं -सीपीआई

भारत की पूंजीवादी राजनैतिक पार्टियां आदिवासियों का आर्थिक विकास नही चाहतीं -सीपीआई


बीजापुर-सीपीआई जिला-सचिव कमलेश झाडी जारी कर कहा मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था का रीड मानी जाती है पर इसमें हो रहे भ्रष्टाचारके आरोपों पर भाजपा और कांग्रेस मौन हैं।दरअसल कांग्रेस औऱ भाजपा नही ये चाहती आदिवासियों व ग्रामीण क्षेत्र का विकास हो।गांवो कि हालत सुधरे औऱ लोग आर्थिक तंगी से निजाद पाए अब तक कई भ्र्ष्टाचार के मामले उजागर हुए हैं पर कार्रवाही कुछ नजर नहीं आई।बस दोनों दल आपस मे एक दूसरे के ऊपर आरोप प्रत्यारोप करने में लगे रहते है वास्तव में दोंनो एक ही थाली के चट्टे बट्टे हैं दोनों की विकास को लेकर पॉलिसी में कोई अंतर नहीं है जब भाजपा सत्ता में थी तो कांग्रेस ने भ्रस्टाचार का आरोप लगाया और अब कांग्रेस सत्ता में है तो भाजपा आरोप लगा रही है।
बस्तर का हरा सोना कहे जाने वाले तेंदूपत्ता  ग्रामीण क्षेत्र में निवासरत लोगों के लिए अल्पकालिक रोजगार के साथ अर्थव्यवस्था का मूलाधार है।
तेन्दूपत्ता को लेकर सीपीआई की नीति स्पष्ट है। तेन्दूपत्ता का सही मूल्य पत्ता तोड़ने वाले श्रमिक को दिलाने सीपीआई ने कई जंगी प्रदर्शन किए हैं।
इस वर्ष तेन्दूपत्ता पर भी कोरोना के प्रभाव से इनकार नही किया जा सकता। इस कोरोना काल मे भी पूंजीवादी पार्टीयां तेंदूपत्ते पर ओछी राजनीति करने से नही चूक रही है। 

 तेन्दूपत्ता के राष्ट्रीय करण के बाद भी इसकी नीतियां राज्य अपने नफा नुकसान के अनुसार तय कर रहीं हैं। लघु वनोपज सहकारी समितियां सब कागजी खाना पूर्ति का हिस्सा बन गई हैं।
जिन समितियों पर ठेकेदार द्वारा पत्ता नही खरीदा गया उन समितियों ने क्यों नही तेन्दूपत्ता खरीदा?
सरकार को जवाब देना होगा। सीपीआई आम लोगों से अपील करती है कि सरकार से इन सवालों का जवाब मांगे तथा सरकार से मांग करती है कि जिन इलाकों में समितियों व वन अधिकारियों की लापरवाही से तेन्दूपत्ता तुड़ाई का काम नही हो पाया है वहां प्रति परिवार के मान से बीस-बीस हजार रुपये मुआवजा प्रदान करे।

Ads on article

Advertise in articles 1

advertising articles 2

Advertise under the article