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स्वास्थ्य मंत्रालय का सक्त आदेश हुआ जारी, आदेश जारी होने के तीसरे ही दिन कांकेर जिला के एक क्लीनिक में पड़ा छापा*

स्वास्थ्य मंत्रालय का सक्त आदेश हुआ जारी, आदेश जारी होने के तीसरे ही दिन कांकेर जिला के एक क्लीनिक में पड़ा छापा*

*नर्सिंग होम एक्ट के तहत अवैध क्लीनिक, नर्सिंग होम, डेंटल क्लीनिक व पैथोलॉजी लैब पर कार्यवाही करने स्वास्थ्य मंत्रालय का सक्त आदेश हुआ जारी, आदेश जारी होने के तीसरे ही दिन कांकेर जिला के एक क्लीनिक में पड़ा छापा*

*साईंसवाणी न्यूज संवाददाता सारनाथ कौशल कोंडागांव* 
कांकेर जिला के ब्लाक अंतागढ़ में कल नर्सिंग होम एक्ट तहत एक निजी क्लीनिक में शासन द्वारा छापामार कार्यवाही की गई जिसमें क्लीनिक संचालक दीलिप सरकार द्वारा अवैध रुप क्लीनिक का संचालन करते हुए पाया गया जिसके फलस्वरूप क्लीनिक को तत्काल कार्रवाई करते हुए सील कर दिया गया। अंतागढ़ नगर में हुए इस कार्यवाही से क्षेत्र के अन्य क्लीनिक व लैब संचालको में हड़कंप मच गया है। कार्यवाही के डर से क्षेत्र के सभी लैब व क्लीनिक संचालक अपने-अपने संस्थान को बंद कर दिए हैं। 
               
          कल हुए इस कार्यवाही के बाद से नगर के सभी लैब और क्लीनिक के बंद हो जाने से नगर एवं क्षेत्र के ग्रामीणों को को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। चूंकि नगर एवं क्षेत्र के बहुत से वर्ग ऐसे है जो बरसों से सरकारी अस्पताल में ना जाकर इन्ही प्राईवेट चिकित्सकों से इलाज कराते रहे हैं। इसका एक प्रमुख कारण ये है कि सरकारी अस्पतालों का लचर स्वास्थ्य व्यवस्था, आपातकालीन परिस्थितियों में डाक्टरों का मौजूद ना होना, इलाज कराने पर्ची बनाने लंबी लाईन लगाना. कई बार स्टाफ द्वारा मरीज़ों से दुर्व्यवहार होना, इन्हीं सब कारणों से लोगों का सरकारी अस्पताल से मोह भंग होना और वहां ना जा कर प्राईवेट क्लीनिकों व लैब की ओर रुख करना हैं। 
      
ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद राज्य में जब से नर्सिंग होम एक्ट लागू किया गया है शासन की ओर से समय-समय पर आदेश जारी कर अवैध रुप से संचालित क्लीनिक, नर्सिंग होम, पैथोलॉजी लैब पर कार्यवाही करने नोटिस जारी किया जाता है जिसके तहत राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित इस तरह के विभिन्न अवैध संस्थानों पर प्रशासन द्वारा कार्यवाही किया जाता रहा है। चूंकि राज्य में ऐसे बहुत से संस्थान हज़ारों के तादद में है जो की नर्सिंग होम एक्ट के बिना अवैध रुप से संचालित हैं। जहां पर अप्रशिक्षित, अनुभवहीन और बिना मान्यता प्राप्त डिग्री व डिप्लोमा धारी लोग कार्य करते हैं जिससे जन व धन दोनों हानि होने की संभावना बनी रहती है।
इसका मुख्य कारण यह भी है कि राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था इतनी लचर जटिल व महंगा है कि आम जनता मजबूरी वश ऐसे संस्थानों में जाकर खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां (सरकारी अस्पताल तो है लेकिन स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर नगण्य है) अपना ईलाज कराते हैं जिसका फायदा इस तरह के कम पढ़े लिखे फर्जी डिग्री डिप्लोमा धारी संस्थान खोलकर बैठे लोग उठाते हैं।

      लेकिन इसका दूसरा पहलू यह भी है कि इन्ही में से कुछ ऐसे भी लोग हैं जो बरसों से अपने अनुभवों के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों के दुरूस्थ अंचलो में बेहद ही कम शुल्क लेकर अपनी स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं जिसे छोला छाप कहा जाता है इनमें से कुछ तो शासन द्वारा निर्धारित एक वर्षीय पाठ्यक्रम में मेडिकल प्रशिक्षण प्राप्त कर व परीक्षा पास कर प्रमाणपत्र लेकर बकायाद छत्तीसगढ़ सह चिकित्सकीय परिषद से पंजिकृत किया गया है। जिसे पैरामेडिकल कार्यकर्ता के रूप में परिभाषित किया गया है, जहां प्रशिक्षण पूर्व उन्हें स्पष्ट रूप से बताया गया था कि प्रशिक्षण उपरांत ग्रामीण क्षेत्रों के दुरूस्थ अंचलो में प्राथमिक उपचार हेतू पंजिकृत किया जाएगा और बाद में इन्हें सह चिकित्सकीय परिषद से पंजिकृत भी किया गया परंतु दुर्भाग्यवश बाद में नर्सिंग होम एक्ट लागू होने के चलते इन्हें भी छोलाछाप की श्रेणी में डाल दिया गया है जबकि जिस वक्त इन्हें प्रशिक्षण दिया गया था उस वक्त राज्य में नर्सिंग होम एक्ट लागू नहीं हुआ था।
             कुछ ऐसी ही परिस्थिति अन्य पैथी से उपचार करने वाले चिकित्सक जैसे कि इलेक्ट्रो होम्योपैथी व अल्टरनेटिव पद्धति वालों का है जिसे राज्य सरकार फर्जी व अवैध कहती हैं जबकि कई राज्यों ने व हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें अपने-अपने पैथी पर उपचार करने अनुमति प्रदान की है। 
     मालूम हो कि कई बरसों से इन्ही ग्रामीण चिकित्सकों के भरोसे राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य सेवाएं बहुत हद तक बहाल है। चूंकि बड़े-बड़े एमबीबीएस एवं एमडी व विशेषज्ञ चिकित्सक ग्रामीण क्षेत्रों में जाने से कतराते है लिहाजा यही ग्रामीण चिकित्सक आपातकालीन परिस्थितियों में सेवा देते हैं।

अब देखना ये है कि राज्य शासन के द्वारा जारी हुए इस नाए आदेश के बाद अगर पूरे राज्य कार्यवाही होती है तो इससे राज्य के आम जनता को कितना फायदा और कितना नुकसान होता है ये तो आने वाला वक्त ही बता पाएगा।

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