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तहसीलदार रिचा सिंह पर लगा जमीन फर्जीवाड़ा का एक और गंभीर आरोप

तहसीलदार रिचा सिंह पर लगा जमीन फर्जीवाड़ा का एक और गंभीर आरोप

तहसीलदार रिचा सिंह पर लगा जमीन फर्जीवाड़ा का एक और गंभीर आरोप
बड़े भाई अभिलाष सिंह को फर्जी विक्रयनामा में बनाया गवाह

वसियतनामा में दूसरे का फोटो लगाकर जमीन हड़पने का मामला

अंबिकापुर - मनेन्द्रगढ़ व सोनहत की पूर्व तहसीलदार रिचा सिंह पर में फर्जी वसीयतनामा का एक और गम्भीर आरोप लगा है जिसमें तहसीलदार पर दो पटवारी व आरआई एवं पुलिस दल के साथ मिलकर आदिवासी ग्रामीण के पुश्तैनी जमीन का डरा धमकाकर सीमांकन कराया गया है जिसमें ग्रामीण आदिवासी पिछले 50 वर्षों से काबीज है।

जबकि उक्त भूमि पर वर्षों से ग्राम डंगोरा थाना मनेन्द्रगढ़ निवासी बसंत , जगरनाथ सिंह व नवल साय काबिज हैं। वर्ष २००७ में इनके चाचा मरने से पूर्व इन तीनों के नाम खाता नंबर ४३६ एवं ४९६ रकबा ११३० एवं ०.१०० भूमि वसियतनामा कर दी थी। इसके बाद तहसीलदार व पटवारी से मिली भगत कर वसियतनामा में छल पूर्वक दरिमा थाना क्षेत्र के ग्राम छिंदकालो निवासी सुशील कुमार मिंज के नाम पर जारी कराने का मामला सामने आया है। जबकि मृतक धन साय का छिंदकालो से कोई लेना देना नहीं है और न ही कभी वहां गया है।

आवेदक बसंत सिंह ने कलेक्टर कोरिया व मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन को मामले से अवगत कराते हुए उचित कार्रवाई करने की मांग की है। आवेदक बसंत सिंह का कहना है कि अनावेदक छिंदकालो निवासी सुशील कुमार मिंज अधिकारियों से मिली भगत कर धन सिंह द्वारा किए गए वसियतनामा में फर्जी फोटो लगाकर वसियतनामा तैयार किया गया है। जो कि वसियतनामा में धन साय की फोटो नहीं है। कोई अन्य व्यक्ति धन सिंह बनकर सुशील कुमार के पक्ष में मुख्तारनामा निष्पादित किया है। इस तरह बनावटी व्यक्ति द्वारा धन सिंह बनकर मुख्तारनामा निष्पादित किया है और बनावती मुख्तारनामा के आधार पर सुशील कुमार मिंज ने सगलराम के पक्ष में फर्जी विक्रयनामा निष्पादित किया है। तथा उसें जो गवाह अभिलाष सिंह एवं संतोष सिंह दोनों केदारपुर निवासी बताए गए हैं। इस तरह के फर्जीबाड़ा होने के बावजूद भी १८ मई २०१९ को तहसीलदार मनेन्द्रगढ़ एवं सोनहत तहसीलदार रिचा सिंह तथा दो पटवारी दो आरआई एवं पुलिस बल के साथ पहुंच कर बसंत सिंह के कब्जे वाली भूमि का सीमाकन कर दिया गया। जिससे बसंत सिंह का मकान भी सीमांकन के अंतर्गत उक्त भूमि पर आया है। जबकि वह मकान करीब ५० वर्ष पुराना है। इस तरह जानबुझकर पूर्व मनेन्द्रगढ़ एवं सोनहत तहसीलदार दल बल के साथ पुलिस लेकर डराते हुए व पद का दुरूपयोग करते हुए कब्जे की भूमि पर खुटा गाड़ा गया है। तथा मना करने पर बंद कर देने की धमकी दी गई थी।

पारिवारिक विवाद के कारण कराया गया मामला- बसंत सिंह ने आरोप लगाया है कि बनावटी व्यक्ति द्वारा उक्त भूमि का विक्रय किया गया है। बसंत सिंह के चाचा स्व. धन सिंह कंवर जाति का है और गोंड़ बनकर भूमि का बिक्री किया है। यह सारा काम कार्यशरण सिंह नामक व्यक्ति के द्वारा कराया गया है जिससे बसंत सिंह का पारिवारिक विवाद है। 

फर्जी बिक्रीनामा में तहसीलदार का भाई बना गवाह- जब इस मामले की हमारे द्वारा जांच की गई तो यह पता चला कि विक्रयनामा में अभिलाष सिंह नामक जो गवाह बनाया गया है वह तहसीलदार रिचा सिंह का बड़ा भाई है।वही दूसरा गवाह संतोष सिंह भी तहसीलदार का करीबी रिश्तेदार बताया जा रहा है ? दोनों रिश्तेदारों को गवाह बनाने से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि किस तरीके से इस जमीन की खरीदी बिक्री पर फर्जीवाड़ा किया गया है।

बसंत सिंह ने इस मामले को कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कर पंजीकृत बैनामी की जांच कराने तथा बेचने वाले के संबंध में जांच की जाए तथा जो सीमांकन का कार्रवाई की गई है उसे निरस्त कराने की मांग की है।

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