*बुद्ध ने मानव समाज को शांति और मानवता के साथ कर्मवादी बनकर सफल होने की राह बताई -(बुद्ध जयंती पर विशेष लेख)*
25 मई 2021
*बुद्ध ने मानव समाज को शांति और मानवता के साथ कर्मवादी बनकर सफल होने की राह बताई -(बुद्ध जयंती पर विशेष लेख)*
विश्व शांति के अग्रदूत महाकरुणिक तथागत गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसा-पूर्व ईक्ष्वाकु वंशीय क्षेत्रीय शाक्य कुल के राजा शुद्दोधन के घर में हुआ था।उनकी माँ का नाम महामाया था। 29 वर्ष की आयु में सिद्धार्थ विवाह के उपरांत प्रथम नवजात शिशु राहुल और धर्म पत्नी यशोधरा को त्याग संसार को जरा, मरण,दुखों से मुक्ति दिलाने के मार्ग एवं सत्य दिव्यज्ञान की खोज में राजपाठ त्याग कर वन की और चले गए।वर्षो की कठोर साधना के पश्चात बोध गया (बिहार) बोधिवृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान की प्राप्ती हुई और वे सिद्धार्थ से गौतम बुद्ध बन गए।
आज विश्व में बौद्धों की संख्या लगभग 200 करोड़ हो गई हैं।विश्व के सभी महादीपो में प्रचलित होकर यह एक विश्व धर्म के रूप में स्थापित हो गया हैं।केवल अकेले चीन में ही 100 करोड़ से अधिक बौद्ध हैं।दक्षिण पूर्वी एशिया में बौद्ध धर्म प्रमुख धर्म बन चुका हैं।थाईलैंड एक घोषित बौद्ध राष्ट्र हैं।गौतम बुध्द ने सत्य,अहिंसा,करुणा,मैत्री,शांति पर विशेष जोर दिया। बुद्ध ने व्यक्ति का मूल्यांकन जन्म से नही अपितु कर्म के आधार पर किया।बुद्ध ने आडम्बर,पाखंड,बलिप्रथा,सामजिक भेदभाव का उन्होंने विरोध किया।सम्राट अशोक के पश्चात बाबासाहेब अम्बेडकर ने बौद्ध धर्म अपनाकर इससे भारत में पुनर्स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई।विश्व के सर्वाधिक विकसित देशों में से एक देश जापान ने बौद्ध धर्म कोरिया से होकर जापान में स्थापित हुआ।बौद्ध धर्म जापानी समाज,संस्कृति व राजतंत्र का महत्वपूर्ण प्रेरणास्त्रोत हैं।बुध्द को समस्त विश्व भूमण्डल पर उनके मानवता वादी दृष्टिकोण,शांति,विश्व बंधुता, अहिंसा,प्रज्ञा,शील,करुणा,के लिए उनको माना जाता हैं।बुद्ध का कहना था जीवन में दुखो का कारण इच्छाए हैं अगर मनुष्य अपनी इन्द्रियों पर काबू कर सके तो जिंदगी में कोई कष्ट नही पायेगा।बुद्ध द्वारा सात ऐसे सिद्धांत बताये गए हैं।जिनसे मोक्ष की प्राप्ति होना संभव हैं- सही विश्वास, सही सोच, सही कारवाई,सही प्रयास,आजीविका का सही साधन,सही स्मरण,सही ध्यान।बुद्ध आपने अनुयायीयों से अनमोल आज्ञाओं का पालन करने का अनुरोध किया हैं।बौद्ध धर्म शैक्षिक मानव जीवन के सामाजिक,संस्कृतिक,धार्मिक, आर्थिक एवं राजनैतिक क्षेत्रों में लोग कल्याण की दीक्षा देता हैं।बौद्ध धर्म विश्व के सभी धर्मों में अपना अद्वितीय स्थान रखता है।इस धर्म ने मानव लोक कल्याण की भावना को जन्म दिया और शान्ति का उपदेश देकर सबसे पहले पंचशील के विषय मे अवगत कराया।लोगों को समता, करुणा,प्यार के साथ रहना सिखाया।बौद्ध धर्म सुख मय जीवन बिताने का मार्ग प्रशस्त करता है।महामंगलसुत्त और करणीयमयसुत्त विश्व के मानव को बंधुता के सूत्र में आबद्ध रखने में आज भी सक्षम हैं।इसमें सुरक्षित होना,शिल्प प्राशिक्षित होना,विनयशील होना,मृदु भाषी होना,माता-पिता की सेवा करना, पत्नी और संतानों का पालन- पोषण करना,अहितकारी कर्मो से दूर रहना,दान देना,पवित्र जीवन बिताना,आपत्ति-विपत्ति आने पर साहसपूर्वक उसका सामना करना और विचलित न होना,क्रोध पर विजय प्राप्त करना और क्षमा शीलता को न खोना आदि महामंगलसुत्त प्रमुख बातें है।बुद्ध का सबसे महत्वपूर्ण विचार ‘अत: दीपों भव’ है अर्थात् अपना दीपक स्वयं बनो। इस विचार का मूल यह है कि व्यक्ति को अपने जीवन में किसी भी नैतिक-अनैतिक प्रश्न का फैसला स्वयं करना चाहिए।बुद्ध के नैतिक दृष्टिकोण का दूसरा प्रमुख विचार मध्यम मार्ग के नाम से जाना जाता है। उल्लेखनीय है कि उनका मध्यम मार्ग सिद्धांत आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना बुद्ध के समय था। उनके इन विचारों की पृष्टि इस कथन से होती है वीणा के तार को उतना नहीं खींचना चाहिए कि वह टूट ही जाए या फिर उतना भी उसे ढीला नहीं छोड़ा जाना चाहिए कि उससे स्वर ध्वनि ही न निकले।बुद्ध का कर्मवादी सिद्धांत भी वर्तमान विश्व में काफी महत्त्व रखता है। दरअसल आज जिस तरह व्यक्ति भाग्यवाद तथा तरह-तरह के आडंबरों एवं कर्मकाण्ड में जकड़ता जा रहा है, ऐसे में कर्मवादी सिद्धांत उन्हे मानव कल्याण से जोड़कर समाज को तार्किक बनाने में कारगर साबित हो सकता है।
महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं की उपयोगिता आज के परिप्रेक्ष्य में बढ़ जाती हैं उनकी शिक्षा नैतिकता, करूणा और संवेदनशीलता को बढ़ाने में सहायक हो सकती है, जिसके माध्यम से शांति और सतत विकास पर आधारित एक संघर्ष मुक्त विश्व व्यवस्था को सुनिश्चित किया जा सकता है। सबका हित हो और सभी सुखी रहे ऐसी मंगकामनाओ के साथ बुद्ध जयंती की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।
•गौतम बोंदरे( प्रेस रिपोर्टर,साइंस वाणी बिलासपुर)