बसपा ने जिन साझा हिरासत के महापुरुषों को पैदा किया,आज बही महापुरुष समाज के बिभाजन के कारण बन गये है
बसपा ने जिन साझा हिरासत के महापुरुषों को पैदा किया,आज बही महापुरुष समाज के बिभाजन के कारण बन गये है। जैसे कर्पूरी ठाकुर,मातादीन, जगदेव प्रसाद कुशवाहा,सम्राट अशोक,तथागत बुद्ध, महात्मा ज्योतिबा फूले,शिवाजी,गाडगिल जी,एकलव्य, जयपालसिंह मुंडा,बिरसा मुंडा यह सभी महापुरुष आज के ओबीसी,एससी-एसटी, समाजों के महापुरुष अलग अलग बन चुके हैं। जबकि यह अछूतों के साझा महापुरुष हैं। यह समझने की जरूरत है।
हिंदू धार्मिक ग्रंथ रामायण के द्वारा पैदा हुए महापुरुष भी जातियों के महापुरुष बन चुके हैं। यह इन जातियों के स्वार्थों नेताओं ने अपने निजी स्वार्थ के लिए जातियों में बांट लिए है। जो एक बहुत ख़तरनाक पहल है। जिसके के कारण बहुसंख्यक समाज बिखरता जा रहा है। यह समझने की लोगों को कोशिश करना चाहिए।
हिंदू धार्मिक ग्रंथ गीता और रामायण में कुछ महापुरुष जैसे श्रीकृष्ण भगवान को गीता में भगवान के रूप में उल्लेख मिलता है। गीता और रामायण को लोग भले ही काल्पनिक ग्रंथ मानते हो, लेकिन बहुसंख्यक समाज के जीवन में गीता और रामायण एक अहम हिस्सा है,इसलिए रामायण के महापुरुष महॠषि बाल्मीक,शंमबूकॠषि, निषादराज, कश्यपॠषि, आदि भी जातियों में बट चुके हैं। जबकि यह जातियों के महापुरुष नहीं है। यह समझने की जरूरत है,जरा चिंतन करो। हम क्या समाज को संगठित कर रहे हैं,या बिघटन के लिए काम करके हम स्वार्थ सिद्ध कर रहे हैं।
जातियों के नेताओं को बेनकाब और बेदखल करने के लिए साझा रणनीति पर सभी की भागीदारी से संगठन बनाना होगा। तभी यह स्वार्थों नेता समाज को बांटकर लाभ लेने के लिए महापुरुषों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। यह सांझा बिरासत है, महापुरुषों के जीवन संघर्ष बहुजन शोषित समाज के उत्थान के लिए किया है, किसी जाति के लिए नहीं किया है। यह सभी वर्गों की जातियों के लोगों को समझने की जरूरत है।
बहुसंख्यक समाज के बिभाजन का हिस्सा बने महापुरुष किसी जाति के लिए नहीं लड़ें हैं। इसलिए महापुरुषों को जातियों में नहीं बांट सकते। बहुसंख्यक समाज को छिन्न-भिन्न होने से बचाने के लिए महापुरुषों के संघर्ष को लोगों को बताकर जागरूक करना होगा। महापुरुषों के इतिहास से साफ साफ दिखाई देता है,कि उस समय में जाति नहीं थीं? महापुरुषों ने अन्याय अर्थात शोषण के विरूद्ध शोषित वर्ग के खिलाफ लड़ाई लड़ी। यह महत्वपूर्ण बात है। जिस पर चिंतन की जरूरत है।
डा0बी0आर0अंबेडकर ने भी शोषित जातियों के लोगों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ, शोषित वर्ग के प्रभाव को कम करने के लिए लोगों को संगठित होकर संघर्ष किया, जिसका लाभ आज लोग उठा रहे हैं। लेकिन फिर भी महापुरुषों के नाम पर लोगों को बांट रहे हैं। यदि हमें शैषित वर्ग के खिलाफ लड़ाई लड़ना है, तो हमें एक ऐसे लोकतांत्रिक राजनैतिक संगठन की जरूरत है,जो सभी जातियों के लोगों को साथ लेकर चले। इस रणनीति पर पूरी तरह से लेबर पार्टी आफ इंडिया कार्य कर रही है, जिसके प्रयास से समाज मजबूत होगा और सत्ताशीन बनेगा। जातियों के स्वार्थों नेताओं से समाज को सावधान करना ही होगा। संगठन भले चाहे जितना हो, लेकिन समाज के बिखराव को रोकने में कोई सक्षम नहीं है। इसका लाभ पूंजीवादी संगठन और मनुबादी लोग उठा रहे हैं। लोगों को समझने और समझाने की जरूरत है। हमारे संगठन बोट नहीं काट पा रहे हैं, लेकिन हमारे लोग मनुबादी पार्टी कांग्रेस भाजपा को वोट देते हैं। यह महत्वपूर्ण बात लोगों की समझ आनी चाहिए। जो नहीं आ रही है। जागो बहुसंख्यक जागो।
सुशील कुमार कठेरिया
राष्ट्रीय अध्यक्ष
किसान सेना रिपब्लिक पार्टी
मो 9919353301