-->
बाल विवाह एक सामाजिक कुप्रथा, इसे जड़ से खत्म करना बेहद जरूरी  बाल विवाह रोकने कलेक्टर ने जिलावासियों से की अपील

बाल विवाह एक सामाजिक कुप्रथा, इसे जड़ से खत्म करना बेहद जरूरी बाल विवाह रोकने कलेक्टर ने जिलावासियों से की अपील

बाल विवाह एक सामाजिक कुप्रथा, इसे जड़ से खत्म करना बेहद जरूरी

बाल विवाह रोकने कलेक्टर ने जिलावासियों से की अपील

उत्तर बस्तर कांकेर । निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने जिलावासियों से अक्षय तृतीया पर्व के अवसर पर सम्पन्न होने वाले बाल विवाह की रोकथाम करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक कुप्रथा है, जिसे जड़ से खत्म करना बेहद जरूरी है। बाल विवाह बच्चों के अधिकारों का निर्मम उल्लंघन है। बाल विवाह के कारण बच्चे के पूर्ण और परिपक्व व्यक्ति के रूप में विकसित होने के अधिकार, इच्छा स्वास्थ्य, पोषण व शिक्षा पाने और हिंसा, उत्पीड़न व शोषण से बचाव के मूलभूत अधिकारों का हनन होता है। कम उम्र में विवाह से बालिका का शारीरिक विकास रूक जाता है। वहीं गंभीर संक्रामक यौन बीमारियों की चपेट में आने का खतरा भी बढ़ जाता है और उनके स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ता है।

उन्होंने अपनी अपील में कहा है कि बाल विवाह के कारण कम उम्र की मां और उसके बच्चे दोनों की जान और सेहत खतरे में पड़ जाती है बाल विवाह के कारण जननांग पूर्ण विकसित नहीं होने से गर्भपात का खतरा भी बढ़ जाता है। कम उम्र की मां के नवजात शिशुओं का वजन कम रह जाता है, साथ ही उनके सामने कुपोषण व खून की कमी की भी ज्यादा आशंका बनी रहती है। बाल विवाह की वजह से बहुत सारे बच्चे अनपढ़ और अकुशल रह जाते हैं जिससे उनके सामने अच्छे रोजगार पाने और बड़े होने पर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने की ज्यादा संभावना नहीं बचती है।

जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास ने बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अंतर्गत बाल विवाह करने वाले वर एवं वधू के माता-पिता, सगे संबंधी पर कानूनी कार्यवाही की जा सकती है। उन्होंने कहा कि उक्त अधिनियम 21 वर्ष से कम आयु के लड़के और 18 वर्ष से कम आयु की लड़की के विवाह को प्रतिबंधित करता है। यदि कोई व्यक्ति बाल विवाह करवाता है, करता है अथवा उसमें सम्मिलित होता है, उनको 02 वर्ष तक का कठोर कारावास अथवा 01 लाख रूपए तक का जुर्माना हो सकता है, अथवा दोनां से दण्डित किया जा सकता है। अक्षय तृतीया सहित विभिन्न अवसरों पर होने वाले विवाहों के दौरान बाल विवाह होने की सूचना ग्राम पंचायत स्तर पर बाल संरक्षण समिति, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), संबंधित पुलिस थाना, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला बाल संरक्षण अधिकारी, परियोजना अधिकारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सरपंच, कोटवार, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 एवं महिला हेल्पलाइन नम्बर 181 इत्यादि को दी जा सकती है।


🔷 बसंत प्रधान (अतिरिक्त जिला ब्यूरो चीफ कांकेर)

Ads on article

Advertise in articles 1

advertising articles 2

Advertise under the article