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15वें वित्त आयोग की राशि के कथित दुरुपयोग मामला झगरपुर पंचायत

15वें वित्त आयोग की राशि के कथित दुरुपयोग मामला झगरपुर पंचायत


 

15वें वित्त आयोग की राशि के कथित दुरुपयोग मामला झगरपुर पंचायत 




रायगढ़। जिले के लैलूंगा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत झगरपुर में 15वें वित्त आयोग की राशि के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। पंचायत के एक वार्ड पंच अशोक सा एवं अन्य पंच सहित ग्रामीणों ने कलेक्टर के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर सरपंच और सचिव पर फर्जी जियोटेक और बिना कार्य भुगतान के जरिए सरकारी धन के गबन का गंभीर आरोप लगाया है।


शिकायतकर्ता अशोक कुमार सा, जो वार्ड क्रमांक 18 के पंच हैं, ने जनसमस्या निवारण शिविर में दिए आवेदन में बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान पंचायत में स्वीकृत विभिन्न कार्यों के नाम पर राशि तो आहरित कर ली गई, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्य दिखाई नहीं देते। आरोप है कि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर कार्यों की फर्जी जियोटैगिंग (Geotagging) कर भुगतान प्रक्रिया पूरी कर ली गई।


किन कार्यों में अनियमितता के आरोप


आवेदन के अनुसार निम्नलिखित कार्यों में गड़बड़ी का दावा किया गया है:


पानी टंकी निर्माण — ₹86,300, 


शोकपिट निर्माण — ₹76,550


गली साफ-सफाई — ₹42,900



पंचायत भवन के लिए फर्नीचर (टेबल, कुर्सी, अलमारी) — ₹64,400


इन सभी मदों में कुल ₹2,70,150 की राशि आहरित होने का आरोप है, जबकि शिकायतकर्ता का कहना है कि स्थल पर कोई वास्तविक कार्य नहीं हुआ।


ग्राम सभा को दरकिनार करने का आरोप


ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि इन कार्यों के लिए न तो विधिवत ग्राम सभा की बैठक आयोजित की गई, और न ही कार्यों की पारदर्शी स्वीकृति प्रक्रिया अपनाई गई। इससे पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।


दस्तावेज और साक्ष्य संलग्न


शिकायत के साथ ई-ग्राम स्वराज पोर्टल से प्राप्त जियोटेक फोटो की प्रतियां भी संलग्न की गई हैं। दावा है कि ये तस्वीरें वास्तविक स्थल से मेल नहीं खातीं, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका और गहरी हो जाती है।


कार्रवाई की मांग


शिकायतकर्ता और ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि:


मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए


दोषी पाए जाने पर सरपंच एवं सचिव के विरुद्ध छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम के तहत कार्रवाई हो


और कथित रूप से गबन की गई राशि की वसूली सुनिश्चित की जाए


प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार


फिलहाल इस पूरे मामले में प्रशासनिक स्तर पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला पंचायत स्तर पर वित्तीय पारदर्शिता और निगरानी तंत्र पर गंभीर प्रश्न खड़े कर सकता है।



(नोट: यह खबर शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत आवेदन और उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित है। मामले की सत्यता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।)

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