मामला जनता लॉ कॉलेज गोहपारु का - एलएलबी डिग्री पर BCI की सख्ती, फिर भी ‘डिग्री शॉप’ का खेल जारी?
25 मई 2026
शहडोल। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने स्पष्ट कर रखा है कि विधि स्नातक की डिग्री यानी एलएलबी को प्राइवेट या डिस्टेंस लर्निंग मोड से मान्यता नहीं दी जा सकती। बीसीआई के नियमों के अनुसार एलएलबी एक नियमित (रेगुलर) कोर्स है, जिसमें निर्धारित उपस्थिति, तय समय-सारिणी और संस्थागत शिक्षण अनिवार्य है। इसके बावजूद ऐसे आरोप सामने आते रहे हैं कि कुछ निजी संस्थान नियमों की अनदेखी कर ‘डिग्री वितरण’ का माध्यम बनते जा रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक जनता लॉ कॉलेज गोहपारु जिला शहडोल में विधि स्नातक मे प्रवेश व नामांकन से लेकर अंतिम वर्ष के लघु शोध परीक्षा तक की प्रक्रिया औपचारिकता भर रह जाती है। छात्र वर्ष में केवल प्रवेश और सेमेस्टर परीक्षा के समय संस्थान पहुंचते हैं, नियमित कक्षाओं और शैक्षणिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी नगण्य रहती है। आरोप यह भी है कि फीस समय पर जमा होने पर भी जनता कॉलेज के संस्थापक को छात्र की शैक्षणिक उपस्थिति या गुणवत्ता से कोई विशेष सरोकार नहीं रहता,न ही नियमित क्लासेस चलती हैं , न ही लॉ के की टीचर है।
संभागीय मुख्यालय से महज 25 किलोमीटर मे स्थित जनता ला कॉलेज के संचालक की मनमानी व लापरवाही को लेकर चर्चाएं हैं कि वहां विधि सहित अन्य पाठ्यक्रमों की पढ़ाई केवल कागजों पर चलती है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी आवश्यक है, लेकिन यदि ऐसा है तो यह विधि शिक्षा की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
तीन वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रम, जो मूलतः कठोर अध्ययन, न्यायिक प्रक्रियाओं की समझ और विधिक नैतिकता पर आधारित होता है, यदि केवल शुल्क आधारित औपचारिकता बन जाए तो इसका सीधा असर न्याय व्यवस्था पर पड़ सकता है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि डिग्री प्राप्त करने के बाद बुनियादी अध्ययन कमजोर हो, तो पेशे में प्रवेश के बाद विधिक दक्षता प्रभावित होना स्वाभाविक है।
विधि व्यवसाय केवल पेशा नहीं, बल्कि न्याय प्रणाली की आधारशिला है। ऐसे में यदि किसी भी स्तर पर फर्जी या औपचारिक डिग्री का प्रचलन है, तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया, राज्य बार काउंसिलों और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को समन्वित रूप से यह सुनिश्चित करना चाहिए कि—
एलएलबी केवल नियमित और मान्यता प्राप्त मोड में संचालित हो।
संस्थानों में प्राचार्य की नियुक्ति छात्रों की उपस्थिति, फैकल्टी और पाठ्यक्रम की पूर्णता,l पुस्तकालय की किताबों का सत्यापन वास्तविक निगरानी हो। यू जी सी अधिनियम के मुताबिक कॉलेज कोड 28 के तहत अनिवार्य रूप से प्राचार्य की नियुक्ति अध्यापन हेतु शिक्षकों की व्यवस्था कॉलेज प्रबंधक को की जानी चाहिए लेकिन यह केवल कागजों तक सीमित है। जनता कॉलेज को मान्यता देने वाले विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड मे कॉलेज कोड 28 के तहत शिक्षकों की भर्ती में नियुक्ति की सूचना तो दी लेकिन वह आज तक शिक्षक जनता कॉलेज मे नहीं आया ,न कभी नियमित रूप से विधि की क्लासेस संचालित की गई।जनता कॉलेज में विधि की पढाई हेतु एक भी टीचर नहीं है केवल मनमानी तरीके से पूरी वसूली की गई फीस से जहाँ कॉलेज प्रबंधक कुबेर बने है वहीं देश की न्याय व्यवस्था के प्रतिबिंब और विधि छात्रों के साथ जनता कॉलेज प्रबंधक का यह खेल पिछले कई वर्ष से चल रहा है। और विश्वविद्यालय सब जानते ही अभी भी मौन है। अब यूनिवर्सिटी को टीम गठित कर कॉलेज से छात्रों व शिक्षकों के प्रतिदिन की उपस्थिति पंजी व लघु शोध रिकॉर्ड की जाँच की जाने पर और भी सत्यता प्रकट होगी। संदिग्ध मामलों में डिग्री सत्यापन (Degree Verification Audit) कराया जाए।दोषी पाए जाने पर संस्थान और संबंधित व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई हो। कानून की पढ़ाई का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि न्याय के सिद्धांतों की रक्षा करना है। यदि कहीं भी ‘डिग्री बनाम दक्षता’ का अंतर बढ़ रहा है, तो यह केवल पेशे की प्रतिष्ठा ही नहीं, बल्कि आम नागरिक के न्यायिक अधिकारों के लिए भी खतरे की घंटी है।
अब समय है कि जनता लॉ कॉलेज से संबंधित प्रकरण की जाँच अत्यंत आवश्यक है ताकि विधि पेशे की गरिमा और विश्वसनीयता अक्षुण्ण रह सके।