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जनता को समय पर सेवा न देने पर सीएमओ पर गिरी गाज, कलेक्टर ने लगाया अर्थदंड**लोक सेवा गारंटी अधिनियम की अवहेलना उजागर, नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

जनता को समय पर सेवा न देने पर सीएमओ पर गिरी गाज, कलेक्टर ने लगाया अर्थदंड**लोक सेवा गारंटी अधिनियम की अवहेलना उजागर, नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल



श्री निवास मिश्रा मैहर 
मैहर। आमजन को समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए गए मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2010 के तहत मैहर नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है। कलेक्टर मैहर द्वारा जारी आदेश में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) को निर्धारित समय सीमा में आवेदन का निराकरण न करने का दोषी मानते हुए अर्थदंड अधिरोपित किया गया है। इस कार्रवाई के बाद नगर पालिका प्रशासन की कार्यशैली और जनता के प्रति जवाबदेही को लेकर शहर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत नगर पालिका कार्यालय में प्राप्त एक आवेदन का नियत समय सीमा के भीतर निराकरण नहीं किया गया। संबंधित आवेदन की अंतिम निर्धारित तिथि समाप्त होने के बाद भी प्रकरण लंबित पाया गया। मामले की समीक्षा के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि जिम्मेदार अधिकारी द्वारा समय सीमा का पालन नहीं किया गया, जो अधिनियम की भावना के विपरीत है।

कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी आदेश में उल्लेख किया गया है कि आवेदन का निराकरण समय सीमा के बाहर किया गया, जिसके कारण लोक सेवा गारंटी अधिनियम की धारा 7(1) के अंतर्गत संबंधित अधिकारी पर प्रतिदिन के हिसाब से अर्थदंड अधिरोपित किया जाना न्यायोचित पाया गया। आदेश के अनुसार एक दिन की देरी के लिए सीएमओ पर 250 रुपये का अर्थदंड लगाया गया है, जिसे निर्धारित मद में जमा कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

*कलेक्टर ने माना स्पष्टीकरण असंतोषजनक*

सूत्रों के अनुसार संबंधित अधिकारी को पूर्व में कारण बताओ सूचना पत्र भी जारी किया गया था तथा समय सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद आवेदन का समय पर निराकरण नहीं हो सका। कलेक्टर द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण का परीक्षण करने के बाद उसे संतोषजनक नहीं माना गया और दंडात्मक कार्रवाई की गई।

*जनता के आरोपों को मिली मजबूती*

नगर पालिका के खिलाफ लंबे समय से शहरवासियों द्वारा शिकायतें की जाती रही हैं। लोगों का आरोप है कि कई मामलों में आवेदन और शिकायतों के निराकरण में अनावश्यक विलंब किया जाता है। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, नामांतरण, सफाई व्यवस्था, नाली निर्माण, पेयजल आपूर्ति, सड़क मरम्मत और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े मामलों में लोगों को कई बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत निर्धारित समय सीमा का पालन नहीं होगा तो आमजन का प्रशासनिक व्यवस्था पर विश्वास कमजोर होना स्वाभाविक है। उनका मानना है कि कलेक्टर द्वारा की गई कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि जनता के कार्यों में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

*नगर पालिका की कार्यप्रणाली की जांच की उठी मांग*

इस कार्रवाई के बाद कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने नगर पालिका के बीते वर्षों के कार्यों की स्वतंत्र जांच और प्रशासनिक ऑडिट की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि एक आवेदन में देरी सामने आई है तो अन्य लंबित मामलों की भी समीक्षा होनी चाहिए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कितने मामलों में समय सीमा का पालन किया गया और कितने मामलों में नियमों की अनदेखी हुई।

*प्रशासनिक सख्ती से बढ़ी उम्मीदें*

शहरवासियों ने कलेक्टर की इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए इसे जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। लोगों का मानना है कि इससे अन्य विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी समय सीमा में कार्य करने की सीख मिलेगी। साथ ही यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि भविष्य में नगर पालिका की कार्यप्रणाली में सुधार होगा और नागरिकों को उनके अधिकारों के अनुरूप सेवाएं समय पर उपलब्ध हो सकेंगी।

*लोक सेवा गारंटी अधिनियम का उद्देश्य*

लोक सेवा गारंटी अधिनियम का मूल उद्देश्य आम नागरिकों को सरकारी सेवाएं निर्धारित समय सीमा में उपलब्ध कराना है। यदि कोई अधिकारी या विभाग समय पर सेवा देने में विफल रहता है तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। मैहर में हुई यह कार्रवाई इसी व्यवस्था का एक उदाहरण मानी जा रही है, जिसने प्रशासनिक जवाबदेही को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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