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जांजगीर-चांपा: खरीफ 2026 में किसानों को मिलेगी 2025 के बराबर यूरिया, 80% की सीमा खत्म; उप संचालक कृषि बोले- एकमुश्त वितरण से नहीं होगी किल्लत, स्टॉक के आधार पर समितियों से मिलेगा खाद*

जांजगीर-चांपा: खरीफ 2026 में किसानों को मिलेगी 2025 के बराबर यूरिया, 80% की सीमा खत्म; उप संचालक कृषि बोले- एकमुश्त वितरण से नहीं होगी किल्लत, स्टॉक के आधार पर समितियों से मिलेगा खाद*


_30 जून 2026, जांजगीर-चांपा_  
_संवाददाता: सरिता, साइंस वाणी न्यूज छत्तीसगढ़_  

*खरीफ सीजन 2026 में जांजगीर-चांपा जिले के किसानों के लिए राहत भरी खबर है।* *शासन के नए निर्देशों के बाद अब किसानों को पिछले साल 2025 की तरह एकमुश्त यूरिया उपलब्ध कराई जाएगी।* *सहकारी क्षेत्र में यूरिया वितरण पर लगी 80 प्रतिशत की सीमा को समाप्त कर दिया गया है।* *उप संचालक कृषि राकेश शर्मा ने बताया कि खरीफ 2026 में किसानों को खरीफ 2025 में मिली यूरिया की मात्रा के बराबर खाद उपलब्ध कराई जाएगी।* *इस निर्णय से बुआई के समय किसानों को यूरिया के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।*

*क्या बदला, किसानों को क्या फायदा*  
1. *80% की सीमा खत्म:* *पहले सहकारी समितियों को कुल मांग का सिर्फ 80% यूरिया देने का नियम था।* *अब शासन ने ये सीमा हटा दी है।* *मतलब पात्रता के अनुसार पूरी यूरिया मिल सकेगी।*  
2. *एकमुश्त या चरणबद्ध:* *किसानों को यूरिया का वितरण एकमुश्त अथवा संबंधित सहकारी समिति में उपलब्ध स्टॉक के आधार पर किया जाएगा।* *यानी अगर समिति में पूरा स्टॉक है तो एक बार में पूरी मात्रा मिल जाएगी।*  
3. *स्टॉक कम तो बाद में मिलेगा:* *उप संचालक कृषि राकेश शर्मा ने साफ किया कि यदि किसी समिति में यूरिया की उपलब्धता कम होने से किसान को पात्रता के अनुसार पूरी मात्रा नहीं मिल पाती, तो शेष मात्रा समिति में यूरिया उपलब्ध होते ही प्रदान कर दी जाएगी।* *किसान का कोटा मारा नहीं जाएगा।*  
4. *समय पर बुआई का भरोसा:* *शासन के इस निर्णय से खरीफ सीजन के दौरान आवश्यक उर्वरक समय पर मिल सकेगा।* *इससे फसल की बुआई और पैदावार प्रभावित नहीं होगी।*

*उप संचालक कृषि ने कहा:* *"खरीफ 2026 में किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं।* *पिछले साल 2025 में जिस किसान को जितनी यूरिया मिली थी, उतनी ही मात्रा इस साल भी दी जाएगी।* *80% की बाध्यता खत्म होने से वितरण आसान होगा।* *समितियों को निर्देश दिए गए हैं कि पात्र किसानों को प्राथमिकता से खाद दें।" - राकेश शर्मा, उप संचालक कृषि, जांजगीर-चांपा*

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