22 टांके, तीन दिन अस्पताल और आरोपी अब भी फरार! खरसिया पुलिस की कार्रवाई पर टिकी निगाहें, बाकेली हमले के आरोपी कब होंगे गिरफ्तार?
खरसिया। खरसिया विकासखंड के ग्राम बाकेली में हुई कथित जानलेवा मारपीट की घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पहले 7 तारीख की रात और फिर 8 तारीख की सुबह 30 से 35 अज्ञात लोगों ने घर में घुसकर हमला किया, जिसमें एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया और उसके सिर में 22 टांके लगाने पड़े। घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
पीड़ित पक्ष के अनुसार 7 तारीख की रात करीब 10 बजे भूपेंद्र गबेल, गौरीशंकर, हेमराज गबेल, राजेंद्र महंत एवं उनके साथियों द्वारा डोल नारायण गोंड़ के घर पहुंचकर आटेक की गई। इसके बाद 8 तारीख की सुबह लगभग 9 बजे अज्ञात 30 से 35 लोगों की भीड़ ने कथित तौर पर घर का दरवाजा तोड़ दिया और अंदर घुसकर डोल नारायण गोंड़ तथा उनके पिता सोनू गोंड़ पर हमला कर दिया।
परिजनों का आरोप है कि अज्ञात हमलावरों ने सोनू गोंड़ को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, जबकि घर के भीतर सो रहे डोल नारायण गोंड़ पर लाठी-डंडों से हमला किया गया। हमले में उनके सिर पर गंभीर चोट आई और वे खून से लथपथ होकर घर के भीतर ही गिर पड़े।
जान बचाने के लिए सोनू गोंड़ किसी तरह घर से बाहर निकले और ग्रामीणों से मदद की गुहार लगाई। शोर-शराबा सुनकर गांव के लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक हमलावर फरार हो चुके थे। जब परिजन घर के अंदर पहुंचे तो डोल नारायण गोंड़ गंभीर हालत में पड़े मिले। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां तीन दिनों तक उनका इलाज चला और सिर में 22 टांके लगाने पड़े।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि पीड़ित परिवार के अनुसार घटना की सूचना 8 तारीख को ही खरसिया पुलिस को दे दी गई थी, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। ना ही अज्ञात हमलावर की गिरफ्तारी जिससे ग्रामीणों में भय, असुरक्षा और नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि घर में घुसकर जानलेवा हमला करने वाले लोगों पर भी त्वरित कार्रवाई नहीं होती, तो आम जनता का कानून व्यवस्था से विश्वास कमजोर पड़ सकता है। लोगों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि सभी आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और गांव में शांति का माहौल कायम हो।
अब पूरे क्षेत्र की निगाहें खरसिया पुलिस पर टिकी हैं। सवाल यह है कि आखिर 22 टांके लगने वाली इस गंभीर घटना के आरोपी कब तक कानून के शिकंजे में आएंगे? क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा या फिर कार्रवाई का इंतजार और लंबा होगा?
