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कम लागत, बेहतर उत्पादन: जिले में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को मिल रहा बढ़ावा*प्लाट प्रदर्शन और जन-जागरूकता अभियान से किसानों में बढ़ा विश्वास

कम लागत, बेहतर उत्पादन: जिले में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को मिल रहा बढ़ावा*प्लाट प्रदर्शन और जन-जागरूकता अभियान से किसानों में बढ़ा विश्वास



साइंस वाणी न्यूज़ रायगढ़ प्राप्त जानकारी के अनुसार:- रायगढ़, 01 जून 2026/ जिले में कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ, किफायती और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। रासायनिक खादों पर बढ़ती निर्भरता को कम करने और मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने के उद्देश्य से कृषि विभाग लगातार व्यापक प्रचार-प्रसार अभियान चला रहा है। इस अभियान में भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (इफको) की भी अहम भागीदारी रही है।
           उप संचालक कृषि श्री अनिल वर्मा ने बताया कि किसानों में बढ़ते रुझान को देखते हुए इस वर्ष जिले से 4332 बोतल नैनो यूरिया और 4332 बोतल नैनो डीएपी की मांग भेजी गई है। कृषि विभाग ने बताया कि समिति स्तर पर उर्वरकों का भंडारण सुनिश्चित करने के बाद चयनित एवं अन्य इच्छुक किसानों के बीच इनका सुचारु वितरण किया जाएगा। नैनो उर्वरकों का बढ़ता उपयोग आने वाले समय में जिले की कृषि व्यवस्था को आधुनिक और टिकाऊ दिशा प्रदान करेगा। इससे जहां उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी, वहीं पर्यावरण संरक्षण और मृदा स्वास्थ्य को भी दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
             पिछले वर्ष रबी सीजन से ही जिले में नैनो उर्वरकों को लेकर जागरूकता गतिविधियों की शुरुआत की गई थी, जिसे अब और अधिक प्रभावी रूप दिया गया है। विभाग द्वारा प्रत्येक ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के क्षेत्र में चयनित एक-एक प्रदर्शन प्लाट तैयार किए गए, जहां किसानों को नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के वास्तविक परिणाम दिखाए जा रहे हैं। इन प्रदर्शन प्लॉटों ने किसानों के बीच इन उर्वरकों के प्रति भरोसा और रुचि दोनों को मजबूत किया है।
           कृषि विभाग ने नैनो उर्वरकों के प्रभावी प्रचार-प्रसार के लिए बहुस्तरीय रणनीति अपनाई है। सहकारी समितियों में पोस्टर, बैनर और सूचना सामग्री के माध्यम से किसानों को जागरूक किया जा रहा है। इसके साथ ही विकसित कृषि संकल्प यात्रा और सुशासन तिहार जैसे बड़े आयोजनों में भी विशेषज्ञों द्वारा किसानों को नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के लाभ विस्तार से समझाए गए हैं। नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसल उत्पादन में सुधार देखने को मिल रहा है, बल्कि उर्वरक की लागत में भी उल्लेखनीय कमी आ रही है। यह तकनीक पोषक तत्वों को सीधे पौधों तक पहुंचाकर उनकी अवशोषण क्षमता बढ़ाती है, जिससे खेती अधिक प्रभावी और संतुलित बनती है।

*नैनो डीएपी का उपयोग बेहद है आसान:-

एक लीटर पानी में 5 मिली नैनो डीएपी मिलाकर इसका छिड़काव किया जाता है। एक सामान्य घरेलू ढक्कन (25 मिली) की मात्रा 5 लीटर पानी के लिए पर्याप्त होती है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने भी नैनो डीएपी को किसानों के लिए लाभकारी बताया है। यह उर्वरक पौधों को आवश्यक नाइट्रोजन और फास्फोरस प्रदान करता है, जिससे उनकी बेहतर वृद्धि, विकास और उत्पादन में मदद मिलती है। साथ ही, यह मिट्टी के स्वास्थ्य को भी बेहतर करता है और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में पारंपरिक डीएपी का स्मार्ट विकल्प है। नैनो डीएपी का उपयोग बीज उपचार, मिट्टी में मिलाने और पत्तों पर छिड़काव -तीनों रूपों में किया जा सकता है। यह सभी प्रकार की फसलों के लिए उपयुक्त है और किसानों को उत्पादन बढ़ाने में मदद कर रहा है।

हेमंत कुमार टंडन 
जिला ब्यूरो चीफ रायगढ़ छत्तीसगढ़

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