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महाराष्ट्रीयन महिलाओं ने श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया वट सावित्री पर्व

महाराष्ट्रीयन महिलाओं ने श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया वट सावित्री पर्व

 

महाराष्ट्रीयन महिलाओं ने श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया वट सावित्री पर्व



सेक्टर-2 स्थित हनुमान मंदिर परिसर में महाराष्ट्रीयन समाज की महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों एवं धार्मिक आस्था के साथ वट सावित्री (वट पूर्णिमा) पर्व हर्षोल्लासपूर्वक मनाया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में सुहागिन महिलाओं ने बरगद (वट) वृक्ष की विधिवत पूजा-अर्चना कर अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, अखंड सौभाग्य तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक वातावरण एवं सांस्कृतिक परंपराओं की सुंदर छटा देखने को मिली।






कार्यक्रम की शुरुआत महिलाओं द्वारा स्नान-पूजन एवं पारंपरिक श्रृंगार के साथ की गई। इसके बाद वट वृक्ष की जड़ों में जल अर्पित कर रोली, अक्षत, पुष्प, फल एवं अन्य पूजन सामग्री अर्पित की गई। महिलाओं ने कच्चे सूत के धागे से वट वृक्ष की सात परिक्रमा करते हुए पति की लंबी आयु एवं परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। पूजा के दौरान सावित्री-सत्यवान की पावन कथा का श्रवण किया गया, जिसमें माता सावित्री के अटूट पतिव्रत, दृढ़ संकल्प और साहस का स्मरण किया गया।

इस अवसर पर उषा क्षीरसागर ने वट सावित्री व्रत के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह पर्व हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यता के अनुसार बरगद के वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है तथा यह वृक्ष दीर्घायु और अमरत्व का प्रतीक है। माता सावित्री ने अपने पतिव्रत, बुद्धिमत्ता और अटूट विश्वास के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। उसी ऐतिहासिक प्रसंग की स्मृति में यह व्रत मनाया जाता है और महिलाएं अपने परिवार के सुख, समृद्धि एवं पति की लंबी आयु की कामना करती हैं।







पूजन के पश्चात महिलाओं ने एक-दूसरे को हल्दी-कुमकुम, श्रृंगार सामग्री एवं आम का प्रसाद भेंट कर वट सावित्री पर्व की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए सामाजिक सौहार्द एवं पारिवारिक मूल्यों को भी प्रोत्साहित किया गया। महिलाओं ने भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के संरक्षण का संकल्प लेते हुए नई पीढ़ी को भी इन धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का संदेश दिया।

कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का वातावरण बना रहा। उपस्थित महिलाओं ने सामूहिक रूप से मंगलकामना करते हुए परिवार, समाज एवं राष्ट्र की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण के लिए प्रार्थना की।





इस अवसर पर उषा क्षीरसागर, चारू टल्लू ताई, सुषमा कोल्हे, चित्रा बरणे, मोनिका लाखे सहित महाराष्ट्रीयन समाज की अनेक महिलाएं उपस्थित रहीं। सभी ने पारंपरिक संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों एवं सामाजिक एकता को मजबूत बनाने का संदेश देते हुए एक-दूसरे को वट सावित्री पर्व की शुभकामनाएं दीं।

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