पिता
21 जून 2026
कड़ी धूप में भी देखो,
कभी नहीं सुसताते हैं।
बाधाएँ कितनी भी आएँ,
कभी नहीं घबराते हैं।
धैर्य धरे वह नित्य देखिए,
अपना फर्ज निभाते हैं।
सीना तान रहते खड़े,
स्वाभिमान सिखलाते हैं।
नव सृजन करने को नित,
पथ पर बढ़ते जाते हैं।
स्वयं रहकर अभाव में,
सब कुछ हमें दिलाते हैं।
अंधकार जीवन में आए,
वे प्रकाश बन जाते हैं।
हाथ हमारा वे पकड़कर,
हमको राह दिखाते हैं।
धरती पर ईश्वर रूप में,
प्रथम उन्हें हम पाते हैं।
हम सबके पालन कर्ता,
पिता हमारे कहलाते हैं।
*🙏पितृ दिवस पर सादर प्रणाम🙏*
✍️लोको पायलट-संतोष मिरी 'हेम'
कोरबा (छत्तीसगढ़)
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