सीएमएचओ डॉ. पुष्पेंद्र वैष्णव के एरियर भुगतान पर उठे सवाल, उच्च स्तरीय जांच की मांग!
सीएमएचओ डॉ. पुष्पेंद्र वैष्णव के एरियर भुगतान पर उठे सवाल, उच्च स्तरीय जांच की मांग!
कोषालय अधिकारी बिलाईगढ़ की भूमिका पर भी उठे सवाल, गड़बड़ी हुई तो होंगे जिम्मेदार!
सीएमएचओ सारंगढ़ बिलाईगढ़ डॉ पुष्पेंद्र वैष्णव पर पद के दुरूपयोग का लगा आरोप!
सारंगढ़-बिलाईगढ़:- जिले के वर्तमान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. पुष्पेंद्र वैष्णव के वेतन एरियर भुगतान को लेकर एक गंभीर शिकायत सामने आई है, जिसमें सितंबर 2019 से मार्च 2020 तक की अवधि के वेतन का भुगतान दिसंबर 2022 में एरियर के रूप में किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने इस पूरे प्रकरण को संदिग्ध बताते हुए मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन एवं कलेक्टर सारंगढ़-बिलाईगढ़ से उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
शिकायत के अनुसार डॉ. पुष्पेंद्र वैष्णव वर्ष 2019-20 में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिलाईगढ़ में मेडिकल ऑफिसर के पद पर पदस्थ थे। इस दौरान सितंबर 2019 से मार्च 2020 तक का उनका वेतन किसी कारणवश लंबित रहा। आरोप है कि उक्त छह माह के वेतन का भुगतान लगभग ढाई वर्ष बाद दिसंबर 2022 में एरियर के रूप में किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में किसी भी शासकीय कर्मचारी के लंबित वेतन के भुगतान के लिए निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया, सक्षम अधिकारी की अनुमति एवं आवश्यक दस्तावेजी औपचारिकताओं का पालन किया जाता है, लेकिन इस मामले में पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिस समय उक्त एरियर राशि का आहरण किया गया, उस समय डॉ. वैष्णव स्वयं खंड चिकित्सा अधिकारी सह आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDO) के पद पर पदस्थ थे। ऐसे में यह सवाल उठाया गया है कि क्या उन्होंने अपने ही लंबित वेतन के भुगतान से संबंधित प्रक्रिया में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भूमिका निभाई थी। यदि ऐसा हुआ है तो यह प्रशासनिक निष्पक्षता और वित्तीय अनुशासन के दृष्टिकोण से जांच का विषय बनता है। शिकायतकर्ता का तर्क है कि किसी अधिकारी द्वारा अपने ही वित्तीय प्रकरण से जुड़े निर्णयों या भुगतान प्रक्रियाओं में शामिल होना हितों के टकराव की स्थिति उत्पन्न कर सकता है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
मामले में तत्कालीन कोषालय अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि शासकीय धनराशि का भुगतान विभिन्न स्तरों की जांच एवं सत्यापन के बाद ही संभव होता है। ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि लंबित वेतन के भुगतान हेतु कौन-कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, किस स्तर पर स्वीकृति प्रदान की गई तथा भुगतान किस नियम एवं आदेश के आधार पर किया गया। यदि समस्त प्रक्रिया नियमों के अनुरूप हुई है तो संबंधित अभिलेख सार्वजनिक रूप से इसकी पुष्टि कर सकते हैं, वहीं यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
शिकायत में यह मांग की गई है कि पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एवं उच्च स्तरीय समिति से कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सितंबर 2019 से मार्च 2020 तक वेतन लंबित रहने का वास्तविक कारण क्या था, भुगतान में हुई देरी के लिए कौन जिम्मेदार था, दिसंबर 2022 में एरियर भुगतान किन प्रशासनिक एवं वित्तीय अनुमतियों के आधार पर किया गया तथा क्या भुगतान प्रक्रिया में शासन के वित्तीय नियमों का पूर्णतः पालन किया गया था या नहीं।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी से जुड़ा हुआ है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक माना जाता है। हालांकि शिकायत में लगाए गए आरोपों की अभी तक किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है और न ही संबंधित अधिकारियों का पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने आया है। इसलिए पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग एवं प्रशासनिक हलकों में इस प्रकरण को लेकर चर्चा तेज हो गई है और अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है तथा जांच में कौन से तथ्य सामने आते हैं।