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पर्यावरण दिवस (रोला छंद)

पर्यावरण दिवस (रोला छंद)


हरे भरे सब वृक्ष, देख सबका मन भाऍं।
देकर शीतल छाॅंव, ताप सबका हर जाऍं।।
होते गुण के खान, सदा खुशियाॅं बरसाऍं।
देकर ऊर्जा देख, दुःख सबका हर जाऍं।।

लोभी मानुष देख, वनों को नितदिन काटे।
लेकर नाम विकास, स्वार्थवश उसको छाॅंटे।।
कानन उजड़ा देख, तड़पते पशु नर नारी।
बढ़ा प्रदूषण आज, श्वास लेना है भारी।।

कटते अंधाधुंध, नित्य पेड़ों की डाली।
सूख गए हैं वृक्ष, देख जंगल अब खाली।।
पेड़ों को मत काट, ताप यह बढ़ जाएगा।
गर्मी बढ़ कर देख, पवन लू ‌ के लाएगा।।

सदा लगाओ वृक्ष, बात सब‌ मेरी मानों।
पर्यावरण बचाव, सर्वहित‌ होता जानों।।
बढ़ो पकड़कर हाथ, वृक्ष तुम सदा बचाओ।
हरियाली के संग, बहुत से तुम फल पाओ।।

लोको पायलट-संतोष मिरी 'हेम'

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