मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा का संकल्प: राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार कश्यप ने किया देहदान का ऐलान
मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा का संकल्प: राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार कश्यप ने किया देहदान का ऐलान
बिलासपुर। मानवाधिकार सहायता संस्थान भारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार कश्यप ने मानव सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए मृत्यु उपरांत अपना शरीर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए दान करने का संकल्प लिया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के शरीर रचना विभाग में विधिवत देहदान घोषणा-पत्र भरकर यह प्रेरणादायी निर्णय लिया। उनका यह कदम समाज में मानवता, सेवा और जागरूकता का सशक्त संदेश माना जा रहा है।
राजकुमार कश्यप ने कहा कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल स्वयं के लिए जीना नहीं, बल्कि समाज और मानवता के लिए उपयोगी बनना है। यदि मृत्यु के बाद भी उनका शरीर चिकित्सा विद्यार्थियों के अध्ययन, अनुसंधान और बेहतर चिकित्सा व्यवस्था के निर्माण में सहायक बन सके, तो इससे बड़ा सौभाग्य और कोई नहीं हो सकता।
इस अवसर पर मानवाधिकार सहायता संस्थान भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रमेश कश्यप ने राजकुमार कश्यप के इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा, "मानवता की सबसे बड़ी पहचान सेवा और संवेदना है। मृत्यु के बाद भी यदि हमारा शरीर चिकित्सा शिक्षा, शोध और भविष्य में हजारों लोगों के उपचार का माध्यम बन सके, तो इससे बड़ा मानव कल्याण का कार्य कोई नहीं हो सकता। देहदान महादान है, जो जीवन समाप्त होने के बाद भी समाज के प्रति हमारे दायित्व को जीवित रखता है। राजकुमार कश्यप का यह निर्णय न केवल संस्था, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी है। हमें विश्वास है कि उनकी इस पहल से अनेक लोग देहदान और अंगदान जैसे महादान के लिए आगे आएंगे।"
राजकुमार कश्यप के इस मानवीय निर्णय की उपस्थित लोगों ने मुक्तकंठ से सराहना की। संस्था के प्रदेश अध्यक्ष धरम भार्गव, श्याम मूरत कौशिक, विजय सुमन, आशुतोष कश्यप, संतोष साहू सहित अनेक समाजसेवियों ने कहा कि राष्ट्रीय प्रवक्ता द्वारा लिया गया यह संकल्प समाज में मानव सेवा की भावना को और अधिक मजबूत करेगा तथा लोगों को अंधविश्वासों से ऊपर उठकर देहदान एवं अंगदान जैसे जनहितकारी कार्यों से जुड़ने की प्रेरणा देगा।
उपस्थित लोगों ने आम नागरिकों से भी मृत्यु उपरांत देहदान और अंगदान का संकल्प लेने की अपील करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति का जीवन भले समाप्त हो जाए, लेकिन उसका शरीर चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और मानव कल्याण के माध्यम से वर्षों तक समाज की सेवा करता रह सकता है। राजकुमार कश्यप की यह पहल निस्संदेह मानवता की सेवा के क्षेत्र में एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरेगी।


