स्कूल चले हम... लेकिन जाकर क्या करेंगे?जब कई विषयों के शिक्षक ही नहीं हैं, तो पढ़ाई कैसे होगी?
27 जुलाई 2026
'स्कूल चले हम' अभियान तभी सार्थक होगा, जब प्रत्येक विद्यालय में समय पर सभी विषयों के शिक्षक उपलब्ध हों।
शिक्षक विहीन शिक्षा, विद्यार्थियों के भविष्य के साथ अन्याय है।अतिथि शिक्षक भर्ती में विलंब से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित
प्रदेश में अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में हो रहे अनावश्यक विलंब के कारण अनेक शासकीय विद्यालयों में कई विषयों की पढ़ाई अब तक प्रारंभ नहीं हो सकी है। इससे विद्यार्थियों में चिंता और तनाव की स्थिति निर्मित हो गई है। राज्य शासन द्वारा संचालित ‘स्कूल चले हम’ अभियान का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को समय पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, किंतु विद्यालयों में शिक्षकों की अनुपलब्धता के कारण यह उद्देश्य प्रभावित होता दिखाई दे रहा है।
जुलाई माह लगभग समाप्त होने को है, फिर भी प्रदेश के अनेक विद्यालयों में गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, वाणिज्य तथा अन्य विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। ऐसी स्थिति में विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई बाधित हुई है और लगभग एक माह का शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो चुका है। अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब पढ़ाई समय पर शुरू ही नहीं हुई, तो पूरा पाठ्यक्रम कब और कैसे पूर्ण कराया जाएगा? यदि भविष्य में विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम प्रभावित होता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
यह स्थिति केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है। नवीन अतिथि शिक्षकों की भर्ती समय पर न होने से हजारों योग्य अभ्यर्थियों को रोजगार से वंचित रहना पड़ा है। उनका जुलाई माह का मानदेय भी प्रभावित हुआ है, जिससे आर्थिक कठिनाइयाँ उत्पन्न हो रही हैं।
अतः शासन एवं शिक्षा विभाग से मांग है कि अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को तत्काल पूर्ण कर विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की पदस्थापना सुनिश्चित की जाए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई शीघ्र प्रारंभ हो सके और प्रभावित हुए शैक्षणिक सत्र की भरपाई के लिए विशेष शैक्षणिक योजना बनाई जाए। शिक्षा व्यवस्था में हो रही इस देरी की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए, जिससे भविष्य में ऐसी स्थिति पुनः उत्पन्न न हो।
सरकार से आग्रह है कि सभी रिक्त पदों पर शीघ्र शिक्षक नियुक्त किए जाएँ, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो।
मध्य प्रदेश के अतिथि शिक्षकों के मानदेय वृद्धि की मांग
मध्य प्रदेश में वर्तमान में अतिथि शिक्षकों को अत्यंत कम मानदेय प्रदान किया जा रहा है। वर्ग-1 के अतिथि शिक्षकों को ₹18,000 प्रतिमाह, वर्ग-2 को ₹15,000 प्रतिमाह तथा वर्ग-3 को मात्र ₹10,000 प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है।
अतिथि शिक्षक भी नियमित शिक्षकों की तरह विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे समान दायित्वों का निर्वहन करते हैं, फिर भी उन्हें इतना कम मानदेय दिया जा रहा है कि उनके लिए अपने परिवार का भरण-पोषण करना और मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करना भी कठिन हो गया है। ऐसी स्थिति न केवल अतिथि शिक्षकों के लिए चिंताजनक है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
अतः मध्य प्रदेश शासन से हमारी विनम्र किंतु दृढ़ मांग है कि अतिथि शिक्षकों के मानदेय में तत्काल वृद्धि की जाए तथा इसे न्यूनतम ₹32,000 प्रतिमाह किया जाए। इससे अतिथि शिक्षक सम्मानजनक जीवनयापन कर सकेंगे, अपने परिवार का उचित पालन-पोषण कर पाएंगे और पूर्ण समर्पण के साथ प्रदेश के विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में अपना योगदान दे सकेंगे।
"जो शिक्षक देश का भविष्य गढ़ता है, उसे सम्मानजनक जीवन का अधिकार मिलना ही चाहिए। अतिथि शिक्षकों को उचित मानदेय देना शिक्षा और भविष्य—दोनों में निवेश है।"
मध्य प्रदेश में कार्यरत अतिथि शिक्षक वर्षों से अत्यंत कम मानदेय पर शासन की मंशा के अनुरूप विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। सीमित आय के कारण उनका स्वयं का जीवन आर्थिक एवं सामाजिक असुरक्षा से घिरा हुआ है। ऐसी परिस्थितियों में उनके लिए अपने परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य तथा सम्मानजनक जीवन-यापन करना अत्यंत कठिन हो गया है।
विडंबना यह है कि जो शिक्षक देश के भविष्य का निर्माण करते हैं, वही अपने भविष्य और आजीविका की सुरक्षा के लिए संघर्ष करने को विवश हैं। जब स्वयं शिक्षक का जीवन असुरक्षित हो, तब वह विद्यार्थियों में सुरक्षित एवं समृद्ध भविष्य का विश्वास कैसे उत्पन्न कर सकता है?
अतिथि शिक्षकों ने समय-समय पर शासन एवं प्रशासन के समक्ष मानदेय वृद्धि, रोजगार सुरक्षा तथा स्थायी नीति बनाने की मांग रखी, किंतु अब तक कोई ठोस एवं प्रभावी निर्णय नहीं लिया गया। परिणामस्वरूप हजारों अतिथि शिक्षक आर्थिक कठिनाइयों, बेरोजगारी और असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।
इन्हीं परिस्थितियों से विवश होकर मध्य प्रदेश के अतिथि शिक्षक अब माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर के समक्ष जनहित याचिका (Public Interest Litigation) दायर करने का निर्णय लेने को बाध्य हुए हैं। इस याचिका का उद्देश्य केवल वेतन वृद्धि नहीं, बल्कि अतिथि शिक्षकों के सम्मानजनक जीवन, आर्थिक सुरक्षा तथा विद्यार्थियों के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिकार की रक्षा सुनिश्चित करना है।
अब यह देखना शेष है कि शासन इस गंभीर विषय पर संवेदनशीलता दिखाते हुए कोई प्रभावी नीति बनाता है अथवा न्यायालय के माध्यम से अतिथि शिक्षकों को न्याय प्राप्त होता है। आशा है कि न्यायालय इस महत्वपूर्ण जनहित के प्रश्न पर विचार कर ऐसे निर्देश प्रदान करेगा, जिससे अतिथि शिक्षकों का जीवन सुरक्षित एवं सम्मानजनक बन सके और प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था भी अधिक सुदृढ़ हो।