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मधाईभाठा स्कूल ने RTI में जानकारी देने से खड़े किए हाथ

मधाईभाठा स्कूल ने RTI में जानकारी देने से खड़े किए हाथ


ब्यूरो रिपोर्ट | साइंस वाणी न्यूज
सारंगढ़-बिलाईगढ़ (छत्तीसगढ़)

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के विकासखंड बिलाईगढ़ अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मधाईभाठा से सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई वित्तीय जानकारी को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, वर्तमान जन सूचना अधिकारी एवं प्रभारी प्राचार्य ने लिखित रूप से बताया है कि पूर्व प्रभारी प्राचार्य के कार्यकाल से संबंधित रोकड़ बही (Cash Book), बिल-वाउचर फाइल तथा अन्य महत्वपूर्ण अभिलेख विद्यालय में उपलब्ध नहीं हैं।

इस खुलासे के बाद विद्यालय में पूर्व वर्षों के वित्तीय लेन-देन और अभिलेखों के रखरखाव को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

RTI के तहत मांगी गई थी जानकारी

ग्राम मधाईभाठा निवासी श्री उज्जैन रात्रे ने 25 फरवरी 2026 को सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत आवेदन देकर पूर्व प्रभारी प्राचार्य श्रीमती पुनबाई रात्रे के कार्यकाल की—

- रोकड़ बही (Cash Book Register)
- बिल-वाउचर फाइल

की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं।

समय पर सूचना नहीं मिलने पर आवेदक ने प्रथम अपील लोक शिक्षण संचालनालय (DPI), रायपुर में प्रस्तुत की।

DPI ने दिए थे कार्रवाई के निर्देश

लोक शिक्षण संचालनालय के उप संचालक एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी ने 27 अप्रैल 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी, सारंगढ़-बिलाईगढ़ को प्रकरण नियमानुसार निराकरण कर निर्धारित समय सीमा में जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

वर्तमान प्रबंधन का जवाब

विद्यालय की ओर से जारी पत्रों में बताया गया कि पूर्व अधिकारी के आकस्मिक निधन के कारण वर्तमान प्रभारी प्राचार्य को केवल प्रशासनिक एवं वित्तीय प्रभार प्राप्त हुआ था। पूर्व कार्यकाल के कार्यालयीन अभिलेख, पंजियां एवं अन्य दस्तावेजों का विधिवत भौतिक प्रभार नहीं मिला।

उत्तर में यह भी उल्लेख किया गया कि विद्यालय के स्ट्रांग रूम, अलमारियों तथा उपलब्ध अभिलेखों की खोजबीन के बावजूद मांगी गई रोकड़ बही और बिल-वाउचर उपलब्ध नहीं मिले।

सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 2(f) एवं 2(j) का उल्लेख करते हुए कहा गया कि जो जानकारी कार्यालय में उपलब्ध ही नहीं है, उसे उपलब्ध कराया जाना संभव नहीं है।

उठ रहे हैं कई महत्वपूर्ण प्रश्न

इस प्रकरण के बाद स्थानीय स्तर पर कई सवाल उठ रहे हैं—

- यदि वित्तीय अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं, तो संबंधित अवधि के शासकीय व्यय का सत्यापन और ऑडिट कैसे होगा?
- प्रभार हस्तांतरण के समय अभिलेखों का विधिवत सत्यापन क्यों नहीं हुआ?
- रिकॉर्ड गायब होने की जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
- क्या अभिलेखों के गुम होने या नष्ट होने की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी?

जांच की मांग

स्थानीय नागरिकों एवं आवेदक का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही अथवा वित्तीय अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

महत्वपूर्ण: इस समाचार में वर्णित तथ्य RTI आवेदन, प्रथम अपील तथा संबंधित कार्यालयों द्वारा जारी लिखित उत्तरों के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। "भ्रष्टाचार", "मिलीभगत" अथवा वित्तीय अनियमितता के आरोप अभी जांच एवं सक्षम प्राधिकारी के निष्कर्ष के अधीन हैं। जब तक आधिकारिक जांच में पुष्टि न हो जाए, इन्हें आरोप या आशंका के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

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