एग्रीस्टैक के पेंच में फंसा किसान! 9 सूत्रीय मांगों को लेकर किसान कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन,
रायगढ़। एग्रीटेक पोर्टल में किसान पंजीयन के नए नियम अब किसानों के लिए परेशानी का सबब बनते नजर आ रहे हैं। पंजीयन प्रक्रिया की जटिलताओं, संयुक्त खातेदारी और बायोमेट्रिक सत्यापन जैसी समस्याओं को लेकर छत्तीसगढ़ किसान कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है।
किसान कांग्रेस के रायगढ़ जिला अध्यक्ष देवानंद पटेल /किसान कांग्रेस उपाध्यक्ष धरम लाल साहू/ अनुसुचित जाति कांग्रेस के अध्यक्ष परदेसी चौहान और साथी ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर रायगढ़ को ज्ञापन सौंपकर किसान पंजीयन व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की है। ज्ञापन में साफ कहा गया है कि ऑनलाइन प्रक्रिया और नए नियमों की जटिलता के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
*संयुक्त खातेदारी बनी बड़ी परेशानी*
ज्ञापन के अनुसार संयुक्त खातेदारी
वाली जमीन के किसानों को
अलग-अलग फार्मर आईडी बनाने की प्रक्रिया में दिक्कतें आ रही हैं। एक ही परिवार के किसानों को पंजीयन के लिए अलग-अलग प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है, जिससे समय और संसाधन दोनों खर्च हो रहे हैं।
*बुजुर्ग किसानों के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन चुनौती*
ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बुजुर्ग किसान हैं। बायोमेट्रिक सत्यापन में परेशानी होने पर उनका पंजीयन अटकने की स्थिति बन रही है। किसान कांग्रेस ने ऐसे किसानों के लिए वैकल्पिक सत्यापन व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है।
*किसान बोले—तकनीकी पेंच में न फंसे अन्नदाता*
किसान कांग्रेस ने मांग की है कि तकनीकी और दस्तावेजी प्रक्रिया इतनी कठिन न हो कि किसान सरकारी योजनाओं के लाभ अथवा धान विक्रय जैसी जरूरी प्रक्रिया से ही बाहर हो जाएं। पूर्व में धान बेच चुके किसानों को भी केवल पंजीयन संबंधी तकनीकी समस्या के कारण परेशानी नहीं होनी चाहिए।
*30 अक्टूबर तक बढ़े पंजीयन की तारीख*
ज्ञापन में किसान पंजीयन की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाने की प्रमुख मांग रखी गई है। साथ ही गांव स्तर पर तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने और पंजीयन प्रक्रिया को कम से कम दस्तावेजों वाली एवं सरल बनाने की मांग की गई है।
किसान कांग्रेस ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए किसान हित में एग्रीटेक पंजीयन के नियमों को सरल करने और लंबित किसानों को पर्याप्त समय देने की मांग की है।
अब सवाल यह है—एग्रीटेक के तकनीकी पेंच से परेशान किसानों को कब मिलेगी राहत?