समझौता कर लो नहीं तो जो करना है कर लो, पूरा स्वास्थ्य विभाग हमारे साथ है! मृतक के पिता का सनसनीखेज दावा; पोस्टमार्टम रिपोर्ट* *पर भी सवाल, खरसिया अस्पताल मौत मामले में बढ़ा बवाल*
*खरसिया* । सिविल अस्पताल में उपचार के दौरान तामेश्वर उर्फ प्रद्युम शर्मा की मौत का मामला अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। एक ओर मृतक का परिवार चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाकर न्याय की मांग कर रहा है, तो दूसरी ओर समझौते के लिए कथित दबाव और पैसों के प्रलोभन का आरोप सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
मृतक के पिता रावेन्द्र शर्मा ने स्वास्थ्य मंत्री एवं जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत देकर डॉ. विक्रम राठिया, डॉ. सजन अग्रवाल, स्टाफ नर्स सुमति लोहा (ओटी इंचार्ज) सहित अन्य स्टाफ पर उपचार में लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों ने दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ
*एफआईआर और कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।*
डॉ. विक्रम राठिया ने भेजा है. मृतक के पिता का दावा
रावेन्द्र शर्मा के अनुसार, 7 अगस्त को स्टाफ नर्स सुमति लोहा उनके चाय की दुकान पर पहुंचीं। पिता का आरोप है कि नर्स ने बताया कि उन्हें डॉ. विक्रम राठिया ने मामले में समझौता कराने के लिए भेजा है।
मृतक के पिता का दावा है कि बातचीत के दौरान पैसों का प्रलोभन देकर समझौता करने के लिए कहा गया। इतना ही नहीं, उनके मुताबिक कथित तौर पर यह बात भी कही गई
समझौता कर लो, नहीं तो जो करना है कर लो… पूरा स्वास्थ्य विभाग हमारे साथ है।
अगर शिकायत में लगाए गए ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह पूरे मामले को और गंभीर बना सकते हैं। फिलहाल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है और संबंधित पक्ष का जवाब भी जांच में महत्वपूर्ण होगा।
*अगर विभाग साथ है तो फिर जांच किसकी?”—उठा बड़ा सवाल*
मृतक के पिता द्वारा लगाए गए इस कथित बयान ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर किस आधार पर समझौते की बात कही गई? क्या वास्तव में किसी ने परिवार पर दबाव बनाया? और यदि परिवार ने समझौता नहीं किया तो क्या इसी कारण वह आज भी न्याय के लिए भटक रहा है?
इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।
*पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब तक क्यों नहीं?*
*मामले में एक और बड़ा सवाल*
पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर उठ रहा है। मृतक के परिजन पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी और एफएसएल रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।
परिजनों का कहना है कि जब उनके बेटे की मौत हो चुकी है तो मौत की वास्तविक वजह सामने लाने वाले दस्तावेज परिवार को कब मिलेंगे?
यही वजह है कि अब मृतक के पिता लगातार अधिकारियों के दरवाजे खटखटा रहे हैं। परिवार का सवाल सीधा है—आखिर अपने बेटे की मौत का सच जानने के लिए पिता को दर-दर क्यों भटकना पड़ रहा है?
हमें पैसे नहीं, बेटे की मौत का सच चाहिए
परिजनों की मांग है कि किसी भी प्रकार का दबाव या समझौता नहीं, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, वीडियोग्राफी और एफएसएल रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए तथा यदि जांच में चिकित्सकीय लापरवाही सामने आती है तो संबंधित डॉक्टरों एवं नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाए।
अब पूरे मामले की निगाहें जांच पर
तामेश्वर की मौत, चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप, समझौते के कथित प्रयास, पैसों के प्रलोभन का दावा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर उठ रहे सवाल—इन सबने खरसिया सिविल अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।
*अब सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर तामेश्वर की मौत का पूरा सच कब सामने आएगा?*
कथित समझौते की पेशकश का सच क्या है?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट परिवार को कब मिलेगी?
और अपने बेटे की मौत का न्याय मांग रहा पिता आखिर कब तक अधिकारियों के दरवाजे पर भटकता रहेगा?
इन सवालों के जवाब निष्पक्ष जांच और आधिकारिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होंगे
