रिटायर्ड एसीओ पर चकबंदी में मनमानी के गंभीर आरोप, डीएम से जांच और अभिलेख कब्जे में लेने की मांग
17 अगस्त 2026
रिटायर्ड एसीओ पर चकबंदी में मनमानी के गंभीर आरोप, डीएम से जांच और अभिलेख कब्जे में लेने की मांग
ललितपुर। ग्राम अण्डेला, परगना, तहसील एवं जनपद ललितपुर में चल रही चकबंदी प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सेवानिवृत्त हो चुके सहायक चकबंदी अधिकारी विजय श्रीवास्तव द्वारा कथित रूप से चकबंदी संबंधी कार्यों में हस्तक्षेप किया जा रहा है। शिकायत में चक नक्शा, चक बुक, चक्र बुक तथा रूखबंदी रजिस्टर की जांच कराकर संबंधित अभिलेख तत्काल कब्जे में लेने और विधिक कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में चक बनाए जाने की प्रक्रिया के दौरान किसानों की जानकारी और सहमति के बिना गरीब एवं कम पढ़े-लिखे किसानों से खाली रूखबंदी रजिस्टर पर हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि चक बुक के पन्नों में कथित रूप से छेड़छाड़ तथा चक नक्शे में सफेदा लगाकर चक नंबर बदले जाने जैसी अनियमितताएं की जा रही हैं।
30 जून 2026 को सेवानिवृत्त होने के बाद भी काम करने का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि विजय श्रीवास्तव 30 जून 2026 को सहायक चकबंदी अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि वह अपने पुत्र अनुराग श्रीवास्तव के साथ चक नक्शे पर चक बनाए जाने संबंधी कार्यों में कथित रूप से हस्तक्षेप कर रहे हैं। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि किसानों को अलग-अलग बुलाकर कथित रूप से लेनदेन किया जा रहा है और बड़ी जोत वाले किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए छोटी जोत वाले गरीब किसानों के हितों की अनदेखी की जा रही है। आरोप है कि इससे छोटे एवं सीमांत किसान अपने खेतों और भविष्य को लेकर परेशान हैं।
अभिलेखों की जांच से सामने आ सकता है सच
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि ग्राम अण्डेला की चकबंदी प्रक्रिया से संबंधित चक नक्शा, चक बुक, चक्र बुक एवं रूखबंदी रजिस्टर को तत्काल सुरक्षित कराकर उनकी जांच कराई जाए। साथ ही यह भी जांच की जाए कि सेवानिवृत्ति के बाद संबंधित व्यक्ति द्वारा किसी प्रकार की सरकारी चकबंदी कार्रवाई में हस्तक्षेप किया गया या नहीं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अभिलेखों की निष्पक्ष जांच और मौके पर जांच कराई जाए तो कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। उन्होंने जिलाधिकारी से मामले में उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की मांग की है।
हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों एवं आरोपित पक्ष का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
चरन सिंह प्रभारी उत्तर प्रदेश एवं मनीषा विशेष संवाददाता उत्तर प्रदेश