सेवा की कहानी: आंखों में लौट रही रोशनी, बच्चों की पढ़ाई भी हो रही आसानरायगढ़ में 1,223 मोतियाबिंद ऑपरेशन, 19,492 स्कूली बच्चों की हुई नेत्र जांच
25 सितंबर 2026
संवाददाता - संतोष कुमार चौहान
साइंस वाणी न्यूज़ रायगढ़
रायगढ़। आंखों की रोशनी कमजोर होना या मोतियाबिंद के कारण दृष्टि प्रभावित होना व्यक्ति के दैनिक जीवन के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई में भी बाधा बन सकता है। ऐसे लोगों को राहत पहुंचाने के लिए रायगढ़ जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा नेत्र स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएं लगातार उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप एवं कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में जिले में मोतियाबिंद मरीजों के उपचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत ने बताया कि जिले में 7 हजार मोतियाबिंद ऑपरेशन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरुद्ध अब तक 1,223 मरीजों के सफल ऑपरेशन किए जा चुके हैं। निःशुल्क उपचार मिलने से मरीजों को दृष्टि संबंधी परेशानियों से राहत मिल रही है।
जन्मजात मोतियाबिंद से पीड़ित 7 बच्चे चिन्हांकित
जिले में जन्मजात मोतियाबिंद से पीड़ित 7 बच्चों की पहचान की गई। इनमें से 4 बच्चों का सफल ऑपरेशन नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मीना पटेल द्वारा किया जा चुका है। कम उम्र में बीमारी की पहचान और समय पर उपचार से बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद मजबूत हुई है।
19,492 स्कूली बच्चों की नेत्र जांच
स्कूली बच्चों की आंखों की जांच भी स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। जिले की 647 माध्यमिक शालाओं के 19,492 बच्चों का नेत्र परीक्षण किया गया। जांच के दौरान 1,479 बच्चों में दृष्टि दोष पाया गया। इन बच्चों को पढ़ाई में परेशानी न हो, इसके लिए निःशुल्क चश्मे उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
नेत्रदान के प्रति भी जागरूकता
सिविल सर्जन डॉ. दिनेश पटेल ने बताया कि नेत्र स्वास्थ्य के साथ लोगों को नेत्रदान के लिए भी जागरूक किया जा रहा है। सत्र 2025-27 में अब तक 2 व्यक्तियों द्वारा नेत्रदान किया गया है। नेत्रदान किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में रोशनी लाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
इन स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर तरीके से संचालित करने में शासकीय किरोड़ीमल जिला चिकित्सालय की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। चिकित्सक दल में डॉ. मीना पटेल, डॉ. सोनाली अग्रवाल एवं डॉ. आर.एम. मेश्राम शामिल हैं। वहीं एन.के. परिकर, नेत्र सहायक अधिकारी, ओटी स्टाफ एवं वार्ड स्टाफ द्वारा भी निरंतर सहयोग किया जा रहा है।