50 किमी साइकिल चलाकर कॉलेज जाते थे संजय, अब जेआरएफ में 158वीं रैंक
छोटे किसान के बेटे ने बिना कोचिंग स्व-अध्ययन से हासिल की सफलता, पांच साल तक रोज चार घंटे सफर कर की पढ़ाई
संजय छोटे किसान बच्चू लाल सोनी के पुत्र हैं। उनका विद्यार्थी जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा। एक पैर से दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने करीब पांच वर्षों तक प्रतिदिन लगभग 50 किलोमीटर साइकिल चलाकर कॉलेज आना-जाना किया। घर से कॉलेज पहुंचने और लौटने में करीब चार घंटे लगते थे। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पढ़ाई के साथ उन्हें परिवार की मदद भी करनी पड़ती थी।
संजय अपने पिता के साथ कृषि कार्य में हाथ बंटाने के अलावा बाजार में समोसे बेचने का काम भी करते थे। कई बार कॉलेज से आधी छुट्टी लेकर वे बाजार पहुंचते और परिवार की दुकान में सहयोग करते थे। इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई का सिलसिला जारी रखा और उच्च शिक्षा की ओर लगातार बढ़ते रहे।
सीएसआईआर-यूजीसी नेट जेआरएफ की तैयारी के लिए संजय ने किसी कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया। उन्होंने स्व-अध्ययन को आधार बनाया और जरूरत के अनुसार यूट्यूब से भी अध्ययन सामग्री प्राप्त की। इससे पहले वे वीआरईटी-जीजीवी, सीजीएसईटी, गेट और सीजीटीईटी द्वितीय प्रश्नपत्र जैसी परीक्षाएं भी उत्तीर्ण कर चुके हैं।
वर्तमान में संजय गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय, बिलासपुर में रसायन विज्ञान विषय से पीएचडी कर रहे हैं। पीएचडी की आवासीय अवधि पूरी करने के बाद वे शासकीय महाविद्यालय सिलफिली, सूरजपुर में रसायन विज्ञान के अतिथि व्याख्याता के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।
संजय ने अपनी सफलता का श्रेय शासकीय आर.आर.एम. स्नातकोत्तर महाविद्यालय के रसायन विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. विकेश कुमार झा के निरंतर मार्गदर्शन और प्रोत्साहन को दिया। वहीं विश्वविद्यालय में शोध के दौरान अपने शोध निर्देशक डॉ. नीरज सिंह, प्रो. जी.के. पात्रा, विभागाध्यक्ष प्रो. के.सी. देवांगन, विभाग के प्राध्यापकों और शोध प्रयोगशाला के साथियों के सहयोग के प्रति आभार जताया।
महाविद्यालय के प्राचार्य, प्राध्यापकों तथा गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग ने संजय को सफलता पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और सफल शोध यात्रा की शुभकामनाएं दी हैं। संजय की उपलब्धि सीमित संसाधनों के बीच निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की मिसाल है।