67वीं बार रक्तदान - आचार्य डॉ. अजय आर्य ने दिया मानवता का संदेश*“रक्त की कुछ बूंदें किसी अनजान के जीवन की उम्मीद बन सकती हैं
23 सितंबर 2026
दुर्ग। सुप्रसिद्ध लेखक, वैदिक विचारक, शिक्षक एवं समाजसेवी आचार्य डॉ. अजय आर्य ने 67वीं बार रक्तदान कर समाज को परोपकार और मानवता का प्रेरक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि रक्तदान केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद को जीवन देने का अवसर है। दुर्घटना, गंभीर बीमारी, प्रसव, शल्य चिकित्सा तथा आपात परिस्थितियों में समय पर रक्त उपलब्ध होना जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रक्त का निर्माण किसी कारखाने में नहीं होता, इसकी उपलब्धता स्वस्थ और पात्र रक्तदाताओं के सहयोग से ही संभव है।
आचार्य डॉ. अजय आर्य ने कहा, “अनजाने लोगों की मदद करने का आनंद ही अलग है। रक्तदान करते समय यह पता नहीं होता कि हमारा रक्त किसके काम आएगा, लेकिन यह संतोष जरूर होता है कि हमारी कुछ बूंदें किसी परिवार की मुस्कान वापस ला सकती हैं।”
*छुट्टी के बाद घर नहीं, सीधे रक्तदान केंद्र*
रक्तदान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता किसी विशेष अवसर तक सीमित नहीं है। कई बार विद्यालय की छुट्टी के तुरंत बाद वे रायपुर के लिए रवाना हुए और जरूरतमंद मरीज के लिए रक्तदान किया। रक्तदान के बाद जरूरतमंद लोगों से बातचीत में जब उनकी आर्थिक परेशानी का पता चला तो कई बार वे स्वयं उन्हें रेस्टोरेंट ले गए, चाय-कॉफी और भोजन कराया तथा बिल का भुगतान किया। उनका मानना है कि रक्तदान के साथ मानवीय संवेदना भी जरूरी है।
*गृहप्रवेश की दावत छोड़कर रक्तदान*
एक प्रसंग में गृहप्रवेश के अवसर पर परिवार के साथ भोजन चल रहा था। भोजन समाप्त ही हुआ था कि आशीर्वाद ब्लड बैंक से फोन आया कि किसी जरूरतमंद को तत्काल रक्त की आवश्यकता है। उन्होंने तत्काल अपने मित्रों से कहा, “आप मेरे परिवार को घर छोड़ दीजिए, किसी को रक्त की जरूरत है।” और स्वयं रक्तदान के लिए निकल गए।
उनके इन कार्यों को देखकर लोग अक्सर पूछते हैं - “आपको ऐसा करके क्या मिलता है?” उनका सहज उत्तर है - “किसी अनजान व्यक्ति की जिंदगी बचाने में सहयोग करने से बड़ा संतोष और क्या हो सकता है?”
आचार्य डॉ. अजय आर्य ने स्वस्थ एवं पात्र नागरिकों, विशेषकर युवाओं से रक्तदान के लिए आगे आने की अपील करते हुए कहा कि “हमारा थोड़ा-सा रक्त किसी दूसरे व्यक्ति के लिए जीवन की सबसे बड़ी जरूरत हो सकता है। इसलिए स्वयं रक्तदान करें और कम से कम एक अन्य व्यक्ति को भी रक्तदान के लिए प्रेरित करें।”
उन्होंने कहा कि रक्तदान में किसी का परिचय नहीं पूछा जाता - रक्त की जरूरत के सामने केवल मानवता महत्वपूर्ण होती है। एक रक्तदान किसी अनजान परिवार के लिए जीवन का वरदान बन सकता है।
*विभागाध्यक्ष डॉ. चुरेंद्र ने की सराहना*
विभागाध्यक्ष डॉ. चुरेंद्र ने आचार्य डॉ. अजय आर्य के नियमित रक्तदान और सेवा-भाव की सराहना करते हुए कहा कि उनका यह कार्य समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ एवं पात्र लोगों को डॉ. आर्य से प्रेरणा लेकर रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए, क्योंकि समय पर किया गया रक्तदान किसी जरूरतमंद के लिए जीवन बचाने वाली सहायता बन सकता है।
रक्तदान के दौरान परिचारिका अधिकारी सती गुप्ता, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी माला देशमुख, प्रयोगशाला तकनीशियन मधुसूदन देवांगन, तरुणा रावत, हिमांशु चंद्राकर तथा पर्यवेक्षक रूपेश सरपे सहित अस्पताल के कर्मचारियों ने सहयोग प्रदान किया।