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साइंस वाणी न्यूज संवाददाता मणिकांत कुर्रे द्वारा साईकिल के अविष्कार से संबंधित लघु संदेश।

साइंस वाणी न्यूज संवाददाता मणिकांत कुर्रे द्वारा साईकिल के अविष्कार से संबंधित लघु संदेश।

चांपा जिला जांजगीर-चांपा।

हेप्पी बर्थडे साइकिल जी

प्राप्त जानकारी के अनुसार साईकिल को सर्वप्रथम 1817 में कार्ल वान ड्रेइश ने लकड़ी से बनाया 

बडी़ खुशी हुई ये जानकर की पैदल से कम से कम साईकिल 

मगर जरा रुकिए भाई साहब इस साईकिल में पहिया तो था मगर चलाने के लिए पैडल नहीं था हां इसे जमीन में खुद के पैरों से धक्का मारकर चलाना पड़ता था 

यात्रियों को हुई असुविधा के लिए हमें खेद है 

फिर क्या 1817 से 1860 तक लगभग 43 साल तक साइकिल पेल ढपेल के ही चलता रहा 

इतने साल गुजर गए तब कहीं जाकर पियरे लालमेंट और पियरे माइकक्स नाम के व्यक्तियों ने पायडल वाला साइकिल बनाया 

लेकिन 1817 से 1860 के बीच के समय में पहियों में लगातार संसोधन होता रहा है 

1885 सन् में जान केम्प स्टार ली ने साईकिल में बहुत आवश्यक बदलाव किए 

हां आपको बता दें इस समय के साईकिल के दोनों पहिये बराबर थे बराबर हैं और बराबर रहेंगे 

क्योंकि 1885 के बाद से अभी तक भले ही कई कंपनियों का साइकिल आप इस्तेमाल कर रहे हों लेकिन डिजाइन वहि दोनों पहिये और पैडल बराबर वाले ही देखने में जहां में हर जगह मौजूद हैं।
            वर्तमान आधुनिकता के इस दौर में भले ही संसाधन के कइ उपकरण का अविष्कार किया गया है मगर साइकिल का पद समय चक्र को देखते हुए आज भी सर्वोच्च है। 
         पाठकों जरा एक क्षण भाग दौड़ भरे जीवन में उलझे हुए अपने व्यस्त मस्तिष्क को इस बात पर इंगित कीजिए कि जब प्रकृति अपना इंधन का खजाना न्यौछावर कर पुरी शुन्य हो जाएगी तब वर्तमान आधुनिकता के लत से लिप्त मनुष्य का क्या होगा?

नमस्कार 
जय जोहार 
जय विज्ञान 

( नोट - निम्नलिखित पंक्तियां गुगल से प्राप्त जानकारी के द्वारा लिखी गई है सिर्फ सामान्य ज्ञान के लिए )

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