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पत्रकारों और एक्टिविस्टों की सुरक्षा का मामला DGP तक पहुंचा, डिजिटल फॉरेंसिक जांच की मांगसरगुजा में जनहित के मुद्दे उठाने वालों पर चरित्र-हनन और सोशल मीडिया अभियान के आरोप; अकील अहमद अंसारी सहित पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर शिकायत

पत्रकारों और एक्टिविस्टों की सुरक्षा का मामला DGP तक पहुंचा, डिजिटल फॉरेंसिक जांच की मांगसरगुजा में जनहित के मुद्दे उठाने वालों पर चरित्र-हनन और सोशल मीडिया अभियान के आरोप; अकील अहमद अंसारी सहित पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर शिकायत


संवाददाता - संतोष कुमार चौहान 
साइंस वाणी न्यूज़ रायपुर 

रायपुर/अंबिकापुर।
सरगुजा क्षेत्र में पत्रकारों और सोशल मीडिया एक्टिविस्टों के खिलाफ कथित चरित्र-हनन, व्यक्तिगत टिप्पणियों तथा सोशल मीडिया के माध्यम से धार्मिक एवं सामाजिक वैमनस्य पैदा करने के आरोपों को लेकर मामला अब पुलिस मुख्यालय तक पहुंच गया है। शिकायतकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने तथा संबंधित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि गरीबों, आदिवासियों, महिलाओं, जमीन संबंधी मामलों और अन्य जनहित के मुद्दों को उठाने वाले पत्रकारों एवं एक्टिविस्टों को सोशल मीडिया के माध्यम से निशाना बनाया जा रहा है। उनका दावा है कि कुछ मामलों में व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी पुरानी सामग्री को सार्वजनिक कर छवि खराब करने तथा विवादों को धार्मिक रंग देने का प्रयास किया गया।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता पुलिस जांच एवं उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के परीक्षण से ही स्पष्ट हो सकेगी।
अकील अहमद अंसारी सहित कई नामों का उल्लेख
शिकायत में असिस्टेंट प्रोफेसर एवं सोशल मीडिया एक्टिविस्ट अकील अहमद अंसारी, वरिष्ठ पत्रकार जितेन्द्र कुमार जायसवाल, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर आकांक्षा टोप्पो सहित अन्य पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का उल्लेख किया गया है।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इन लोगों ने सरगुजा में जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों को पत्रकारिता और सोशल मीडिया के माध्यम से उठाया है। इसी क्रम में अंसारी से जुड़े एक पुराने निजी प्रकरण को सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने का आरोप लगाया गया है।
शिकायत में दावा किया गया है कि यह मामला वर्ष 2015 में उच्च न्यायालय, बिलासपुर में समाप्त हो चुका था। इस दावे का आधिकारिक न्यायिक रिकॉर्ड से स्वतंत्र सत्यापन किया जाना आवश्यक है।
सोशल मीडिया गतिविधियों की फॉरेंसिक जांच की मांग
शिकायतकर्ताओं ने केवल संबंधित सोशल मीडिया पोस्टों की जांच की मांग नहीं की है, बल्कि पूरे डिजिटल घटनाक्रम की वैज्ञानिक जांच की मांग रखी है।
इसके तहत—
मूल पोस्ट किस अकाउंट से प्रकाशित हुई?
पोस्ट पहली बार कब और किसने साझा की?
किन अकाउंट्स से इसे आगे प्रसारित किया गया?
किन लोगों को टैग किया गया?
कमेंट और शेयर का पैटर्न क्या रहा?
क्या अलग-अलग अकाउंट्स से समान सामग्री एक ही समय में प्रसारित हुई?
क्या किसी समन्वित सोशल मीडिया अभियान के डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध हैं?
इन बिंदुओं की जांच के लिए पोस्टिंग टाइमलाइन, अकाउंट गतिविधि, टैगिंग, शेयरिंग पैटर्न तथा उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड का फॉरेंसिक परीक्षण कराने की मांग की गई है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव से जुड़े आरोप भी जांच के दायरे में
शिकायत में कुछ राजनीतिक एवं सामाजिक पदाधिकारियों की सोशल मीडिया गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं ने भाजपा जिला अध्यक्ष सरगुजा भारत सिंह सिसोदिया तथा CAIT के प्रदेश उपाध्यक्ष रवीन्द्र तिवारी सहित अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग की है।
हालांकि किसी सोशल मीडिया पोस्ट को लाइक या कमेंट करना अपने आप में किसी आपराधिक षड्यंत्र का प्रमाण नहीं है। इसलिए शिकायतकर्ताओं ने मूल डिजिटल डेटा और पूरे घटनाक्रम की जांच कराने की मांग की है, ताकि तथ्यों और आरोपों के बीच अंतर स्पष्ट हो सके।
शिकायत में FIR क्रमांक 482/2025 का भी उल्लेख किया गया है। इस मामले में वास्तविक स्थिति जानने के लिए पुलिस एवं न्यायालय के आधिकारिक रिकॉर्ड का परीक्षण आवश्यक होगा।
अनुपम वस्त्रालय प्रकरण भी चर्चा में
मामले में अनुपम वस्त्रालय प्रकरण का भी संदर्भ दिया गया है। उपलब्ध प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, सर्व आदिवासी समाज महिला प्रकोष्ठ ने सितंबर 2026 में इस मामले को लेकर शिकायत करते हुए निष्पक्ष जांच, डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों पर कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।
रिपोर्टों के मुताबिक, महिला प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष सुनीता सोनहा की ओर से 21 सितंबर 2026 को IG सरगुजा रेंज को भी शिकायत दिए जाने का उल्लेख सामने आया है।
इन घटनाक्रमों को वर्तमान शिकायतकर्ता एक व्यापक संदर्भ के रूप में देखते हुए अलग-अलग मामलों की कड़ियों की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
DGP के समक्ष प्रमुख मांगें
शिकायतकर्ताओं ने पुलिस महानिदेशक के समक्ष मुख्य रूप से निम्न मांगें रखी हैं—
1. सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग
अकील अहमद अंसारी एवं उनके परिवार की सुरक्षा संबंधी स्थिति का आकलन कर आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
2. आरोपों की कानूनी जांच
धीरज सिंह, गौतम सिंह चौहान तथा जांच में सामने आने वाले अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर, अपराध पाए जाने पर लागू कानून के तहत कार्रवाई की जाए।
3. डिजिटल फॉरेंसिक जांच
सोशल मीडिया पोस्ट, अकाउंट गतिविधियों, शेयर, टैग, कमेंट, पोस्टिंग टाइमलाइन और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच कराई जाए।
4. आपत्तिजनक सामग्री की जांच
धमकी, घृणा फैलाने, धार्मिक वैमनस्य या चरित्र-हनन से संबंधित सामग्री की कानून के अनुसार जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
5. स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच
पूरे घटनाक्रम की जांच CID अथवा किसी स्वतंत्र जांच इकाई से कराने की मांग की गई है।
पत्रकारिता और सोशल मीडिया विवाद के बीच निष्पक्ष जांच की मांग
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि किसी पत्रकार या एक्टिविस्ट की रिपोर्टिंग पर आपत्ति है तो उसका जवाब दस्तावेज, तथ्य और कानून के माध्यम से दिया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि निजी जीवन से जुड़ी सामग्री को सार्वजनिक कर विवाद को व्यक्तिगत या धार्मिक रंग देने से पत्रकारों और संबंधित व्यक्तियों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
वहीं, जिन लोगों पर सोशल मीडिया अभियान चलाने के आरोप लगाए गए हैं, उनका पक्ष और मूल डिजिटल सामग्री भी जांच का हिस्सा होना जरूरी है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री का वास्तविक स्रोत क्या था और उसका प्रसार किस प्रकार हुआ।
पुलिस कार्रवाई पर टिकी निगाहें
मामला अब शिकायत और आरोपों से आगे बढ़कर जांच की प्रक्रिया पर निर्भर है। यदि जांच में कानून का उल्लंघन, धमकी, साइबर उत्पीड़न या धार्मिक वैमनस्य फैलाने से संबंधित तथ्य सामने आते हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। वहीं यदि लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं होती है, तो जांच के निष्कर्ष से स्थिति स्पष्ट होगी।
शिकायत करने वालों में डी.पी. गोस्वामी (नया इंडिया), विद्यानंद ठाकुर (प्रधान संपादक, आज का दिन), शैलेश शर्मा, पारितोष शर्मा और दिव्या शर्मा गोस्वामी (प्रधान संपादक, डेमोक्रेसी प्रतिबिंब) सहित अन्य पत्रकारों के नाम बताए गए हैं।
अब मुख्य सवाल यह है कि पुलिस मुख्यालय इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर किस रूप में सामने आती है।
नोट: उपलब्ध ऑनलाइन रिपोर्टों में अकील अहमद अंसारी के समर्थन में ज्ञापन तथा 21 सितंबर की सर्व आदिवासी समाज महिला प्रकोष्ठ की शिकायत का उल्लेख मिलता है, लेकिन आपके मसौदे में वर्णित DGP को दिए गए पूरे ज्ञापन और उसमें शामिल सभी आरोपों का स्वतंत्र आधिकारिक सत्यापन मुझे उपलब्ध स्रोतों से नहीं मिला। इसलिए खबर में उन्हें “शिकायतकर्ताओं का आरोप/दावा” के रूप में रखा गया है। �

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